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NLP Certification in India

एक एनएलपी सर्टिफिकेशन के साथ दूसरा फ्री और दूसरे पर तीसरा फ्री.......

Free NLP Practitioner Certification 03

एक दिन एक जंगल में सुबह के समय एक लोमड़ी शिकार करने निकली । आगे चलकर उसे एक खरगोश दिखाई दिया । लोमड़ी खरगोश को दबोचने ही वाली थी, कि उसे एहसास हुआ कि खरगोश उसकी नज़रों से नजर मिला रहा है और निडर होकर वहीं खड़ा है । कुछ पल के लिए लोमड़ी डर गयी, क्योंकि उसकी अपेक्षा थी कि उसे देखते से ही खरगोश को भागना चाहिए, पर ऐसा कुछ हुआ नहीं था । जैसे ही लोमड़ी खरगोश के तरफ बढ़ी तो खरगोश और सिना तान के उसकें सामने खड़ा रहा । लोमड़ी और आगे बढ़ी, पर खरगोश जगह से हिलने का नाम नहीं ले रहा था । यह सब देखकर लोमड़ी परेशान थी । उसे समझ में नहीं आ रहा था, कि क्या हो रहा है? नजदीक जाने के बाद उसने खरगोश से कहा, “क्या तुम्हें पता नहीं है कि मैं लोमड़ी हूँ और मैं मांसाहार करती हूँ । शायद तुम्हें अंदाजा नहीं है कि मेरे पंजे कितने खुंखार हैं, सिर्फ एक झपट्टा और तुम मौत की नींद सो जाओगे । तुम्हारी औकात ही क्या है मेरे सामने? तुम तो बस एक क्षुद्र प्राणी हो, तुम्हें मुझ से डरना चाहिए । मुझे देखते ही तुम्हें भागना चाहिए । मैं एक लोमड़ी हूँ और एक खुंखार और ताकदवर प्राणी हूँ ।” इसपर शांती से खरगोश ने कहा, “क्या तुम्हारे पास कोई सर्टिफिकेट है लोमड़ी होने का? सर्टिफिकेट चाहिए, नहीं तो हमें कैसे पता चलेगा की तुम कौन हो? जाओ, सर्टिफिकेट लेकर और फिर बात करेंगे ।”

इसपर लोमड़ी भ्रमित हो गई और चल पड़ी शेर की गुफा की तरफ, क्योंकि शेर तो जंगल का राजा था और अगर लोमड़ी होने का सर्टिफिकेट लेना हो, तो उससे ही लेना पड़ेगा और कुछ ही देर में लोमड़ी शेर के सामने खड़ी थी । उसने शेर से कहा, "राजा साहब, जंगल में सारे प्राणी सर्टिफिकेट मांग रहे हैं, उन्हें यकीन नहीं है कि मैं ही लोमड़ी हूँ, कृपा कर मुझे सर्टिफिकेट दे ।” शेर ने कागज लिया, पेन लिया और लिखना शुरू किया, "यह एक लोमड़ी है और मांसाहार करती है । इसकें पंजे बड़े ही खुंखार होते हैं । इसकें सिर्फ एक झपट्टे से छोटे जानवरों की मौत भी हो सकती है, इसीलिए सारे क्षुद्र प्राणियों को इससे डरना चाहिए । इसे देखते ही भाग जाना चाहिए । यह एक लोमड़ी है और एक खुंखार और ताकदवर प्राणी है ।” नीचे शेर ने मुहर लगाई, हस्ताक्षर किए और लोमड़ी को बड़े ही आदर से सर्टिफिकेट दे दिया ।

लोमड़ी सर्टिफिकेट लेकर फिर से खरगोश के पास गई और उसे सर्टिफिकेट दिखाया । सर्टिफिकेट पढ़ने के बाद खरगोश की आँखों में डर छा गया, उसकें हाथ पैर कांपने लगें और पलभर में खरगोश वहाँ से भाग गया । इससे लोमड़ी को बड़ा अच्छा लगा कि चलो कम से कम सर्टिफिकेट देखने के बाद तो खरगोश डर कर भागा याने अब फिरसे छोटे प्राणी मुझसे डरने लगेंगे । उसे लगा कि शेर को धन्यवाद देना चाहिए और इसीलिए लोमड़ी फिर से शेर की गुफा की तरफ चल पड़ी । लोमड़ी ने दूर से ही देखा कि एक गधा शेर के बगल में खड़ा था और शेर से शेर होने का सर्टिफिकेट मांग रहा था । लोमड़ी हैरान थी, उसे इसकी बिलकूल ही उम्मीद नहीं थी कोई शेर से भी सर्टिफिकेट मांग सकता है । जैसे ही गधे ने शेर से सर्टिफिकेट मांगा, शेर ने गधे से कहा, "मुझे अगर भूख लगी है, तो तुझे सर्टिफिकेट मांगने का समय भी नहीं मिलता, अब तक तेरी मौत हो जाती और अगर मुझे भूख नहीं लगी है, तो मुझे पर्वा नहीं है कि तू क्या बकबक कर रहा है ।” फिरसे एकबार दोहराता हूँ, "मुझे अगर भूख लगी है, तो तुझे सर्टिफिकेट मांगने का समय भी नहीं मिलता, अब तक तेरी मौत हो जाती और अगर मुझे भूख नहीं लगी है, तो मुझे पर्वा नहीं है कि तू क्या बकबक कर रहा है ।” शेर का जबाब सुनकर लोमड़ी को एहसास हुआ की सर्टिफिकेट ज्यादा "मैं ताकदवर हूँ ।” यह एहसास, यह स्पिरीट, यह आत्मविश्वास और यह खुमारी दिल में होना जरूरी है ।

यह स्पिरीट, यह आत्मविश्वास और यह खुमारी सिर्फ सर्टिफिकेट होने ने से नहीं आएगी । आपको सर्टिफिकेट के आगे सोचना होगा । आपको इस स्पिरीट को आपके अंदर जगाना पड़ेगा । उस आत्मविश्वास को जगाने के लिए मेहनत करनी होगी । उस खुमारी को आविष्कृत करने के लिए प्रयास करना होगा । यहीं स्पिरीट, यहीं आत्मविश्वास और यहीं खुमारी एक भव्य ताकद को निर्मित करती है, जो किसी आम को खास बनाती है ।

अगर यह कहानी पढ़ने के बाद आप इस निष्कर्ष तक पहुँचे हैं कि सर्टिफिकेट की कोई आवश्यकता ही नहीं है, तो शायद मैं मेरी बात आप तक पहूँचाने में असफल रहा । मुझे सिर्फ इतना ही कहना है कि एनएलपी सर्टिफिकेट से ज्यादा एनएलपी स्पिरीट खड़ा करने की जरूरत है । सर्टिफिकेट सिक्के का सिर्फ एक पहलू है, जो महत्वपूर्ण तो है, पर उससे ज्यादा उस एनएलपी स्पिरीट को जगाना ज्यादा आवश्यक है, इसीलिए आयबीएचएनएलपी सर्टिफिकेट के साथ साथ एनएलपी की ताकद को जागृत करने के लिए आपकी यथासंभव मदद करता है और यहीं वह बात है जो आयबीएचएनएलपी को दूसरों से अलग करती है ।

इसीलिए सर्टिफिकेट के साथ साथ थोड़ी इस बात की भी चिंता करें, कि जिस विषय में आपको सर्टिफाय किया जा रहा है, उस विषय में आपको सच में महारत हासिल हो रही है, या नहीं । मैंने देखा है कि लोगों को एनएलपी के साथ साथ लाइफ कोच का सर्टिफिकेट दिया जाता है और ट्रेनिंग में लाइफ कोचिंग के संदर्भ में कुछ भी नहीं पढ़ाया जाता । लोग सर्टिफिकेट पाकर खुशी मनाते हैं और सर्टिफिकेट देनेवाला पैसे कमाकर । 

 

आयबीएचएनएलपी भी लाइफ कोच का सर्टिफिकेट देता है, पर देने से पूर्व उस विषय के संदर्भ में आपको पूरा मार्गदर्शन दिया जाता है । साथ ही साथ आपको कुछ शर्तों का पालन करना होता हैं । उदाहरण के तौर पर छह दिन के एनएलपी सेमिनार में हम लगभग एक दिन एनएलपी लाईफ कोचिंग को देते हैं और विस्तार से समझाते हैं कि किसप्रकार से एनएलपी की सहायता से आप लाईफ कोचिंग कर सकते हैं । इतना ही नहीं, ट्रेनिंग में आपको लाईफ कोचिंग का प्रात्यक्षिक भी करना होता है, इसीलिए सर्टिफिकेट देने से पूर्व हम इस बात का पूरा खयाल रखते हैं कि जिस विषय में आपको सर्टिफाय किया जा रहा है, उसमें आपको सही माइने में महारत हासील हो । साथ ही साथ ट्रेनिंग के बाद आपको प्रोजेक्ट दिया जाता है, जिसकें तहत आपको तिन लोगों के कम से कम पांच लाईफ कोचिंग सेशन लेने हैं और उस पर प्रोजेक्ट बनाकर आयबीएचएनएलपी को भेजना है । जिससे हमें यह पता चलता है कि आपको जिस एनएलपी लाईफ कोचिंग में सर्टिफाय किया जा रहा है, वह उचित है, या नहीं । क्योंकि आयबीएचएनएलपी एक बोर्ड जिसकी एक ब्रन्ड व्हॅल्यू है और किसी भी किमत पर हम उसे कम नहीं होने देंगे । हमारा प्रयास है कि  आपको बेहतर ट्रेनिंग मिले, सर्वश्रेष्ठ सर्टिफिकेशन मिले और साथ ही साथ आप एनएलपी में सही माइने में महारत हासील करें । अब आप ही सोचे आपको करना क्या है?

Sandip Shirsat NLP Master Trainer
Sandip Shirsat

CEO & Founder of IBHNLP

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