एन.एल.पी. प्रॅक्टिशनर कोर्स के बाद पोस्ट ट्रेनिंग सपोर्ट का महत्त्व

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फोर व्हिलर सीखते समय मुझे जो अनुभव हुआ, पता नहीं आपको भी वैसा ही अनुभव हुआ होगा, या नहीं । अगर नहीं, तो आप याद तो जरूर कर सकते हैं कि आपका वह अनुभव कैसा था?

जब पहली बार मैंने फोर व्हिलर सीखना शुरू किया, वह दिन मुझे आज भी याद है । सुबह का समय था । मैंने पहली बार कार का स्टेयरिंग अपने हाथों में थामा था । वह दिन था 18 अक्टूबर का, मेरे मित्र का जन्मदिन था । सुबह-सुबह वह मुझे गाड़ी सिखाने आ पहुँचा । जाड़े के दिनों की शुरुआत थी । सुबह की सर्द हवा महसूस हो रही थी । वातावरण में बनी ताजगी एवं उल्लास को मैं अनुभव कर रहा था । आकाश में बादल न के बराबर थें, मानो किसी ने आकाश को नीले रंग से पोत दिया हो । जिस रास्ते पर मैं कार चलाने की प्रैक्टिस करने वाला था, वैसे तो वह रास्ता सुनसान था, वहाँ ज्यादा गाड़ियों का ज्यादा आना जाना न था । उस रास्ते पर हमेशा शांती बनी रहती थी । उस दिन पहली बार मैं ड्रायव्हिंग सीट पर बैठा सामने उस खाली रास्ते को निहार रहा था । मेरा मित्र मुझे कुछ सूचनाएँ दे रहा था, जिन्हें मैं ध्यानपूर्वक सुन रहा था । मेरा एक हाथ स्टेयरिंग पर था, मित्र की सूचनाओं का पालन करते हुए, मैंने आहिस्ते से चाबी घुमाई और कार शुरू हुई । एक अजीब सा एहसास हो रहा था, शरीर में एक उत्तेजना थी, मैं थोड़ा नर्व्हस महसूस कर रहा था, मैं अपने आप को अतिशय जागरूक भी महसूस कर रहा था ।

वह एक यादगार दिन था, अगर आपने भी कभी कार चलाना सीखा होगा, तो वे शुरुआती दिन आपके लिए भी यादगार रहे होंगे । मैं हर गुजरते चीज के प्रति जागरूक था, चाहे वे पेड़ हो, या रास्ते से गुजरनेवाली गाड़ियाँ । इतना ही नहीं, उस दिन तो मुझे रास्ते के किनारे पड़े छोटे मोटे पत्थर भी दिखाई दे रहे थें । शायद जीवन में पहली बार मैंने इतनी अवेयरनेस की अनुभूती की थी । वह कार चलाना सीखना एक अभूतपूर्व अनुभव था । मेरा पूरा फोकस गाड़ी चलाने पर था, मानो मेरा शरीर और मन एक हो गया हो ।

धीरे-धीरे कार आगे बढ़ रही थी, मुझे ऐसा एहसास हो रहा था कि जैसे मैं अपने जीवन में आगे बढ़ रहा हूँ, जीत का परचम लहरा रहा हूँ, उस समय मुझे स्वयं के प्रति अच्छा महसूस हो रहा था । कितनी सारी चीजें मैं एक साथ कर रहा था, जैसे कि स्टेयरिंग व्हिल संभालना, गियर बदलना, क्लच एवं ब्रेक का ताल बनाए रखना, उपर से मेरे मित्र की अनगिनत सूचनाएँ सुनना! शुरूआत में यह सब असंभव लग रहा था । कितना कठिन था वह सब एक साथ करना । भविष्य में मैं कभी आराम से गाड़ी चला पाउँगा, इसकी कल्पना करना भी उस समय मुश्किल लग रहा था । कितना अलग और बेहतरीन अनुभव था । पर जैसे-जैसे समय बीतता गया, वैसे-वैसे गाड़ी चलाना महज एक रूटीन बन गया । आज जब मैं अच्छे से गाड़ी चला लेता हूँ, तब भी ये सारी चीजें घट रही हैं, स्टेयरिंग व्हिल, गियर, क्लच, ब्रेक, म्यूजिक, साथ में बैठे सह यात्रियों के साथ गपशप, पर अब यह गाड़ी चलाने की प्रक्रिया अन्कॉन्शस् लेवल पर हो रही है । इसके लिए अब मुझे पहले जैसा प्रयास नहीं करना पड़ता, ना ही मुझे विरूद्ध दिशा से आने वाली हर गाड़ी से डर लगता है । आज यह सब बड़े आराम से हो रहा है, अब मैं गाड़ी चलाना एन्जॉय कर रहा हूँ । अगर आप भी इस अनुभव से गुजरे हैं, तो आपको भी पता होगा कि आज भी आप वही सब कुछ कर रहे हैं, जो आपने गाड़ी सीखने के पहले दिन किया था । पर तब में और अब में सिर्फ एक ही फर्क है, तब चीजें कॉन्शस् इन्कॉम्पिटन्स लेवल पर थीं और आज चीजें अन्कॉन्शस् कॉम्पिटन्स लेवल पर है ।

किसी भी कौशल में महारत हासिल करने के चार तल । 

एन.एल.पी. सीखते समय भी आपको ठीक ऐसा ही महसूस होगा । छह दिनों के एन.एल.पी. ट्रेनिंग वर्कशॉप में आप ढेर सारे एन.एल.पी. टूल्स् एवं टेक्निक्स् सीखेंगे, लगभग बीस से भी ज्यादा और ये सारे एन.एल.पी. स्किल्स् आपको अपने एवं दूसरों के जीवन को परिवर्तित करने में मदद करेंगे । हम एक-एक स्किल अलग-अलग सीखेंगे, पर आखरी दिन हम सारे स्किल्स् को एकत्रित करते हुए एन.एल.पी. का पूरा माजरा क्या है? यह समझने की कोशिश करेंगे । जैसे कि अगर आप किसी को कोचिंग दे रहे हैं, तो सबसे पहले आपको ‘पीक स्टेट’ में आना होगा, क्लाइंट से बात करते हुए आपको अपनी सेन्सरी अक्युटी का इस्तेमाल करना होगा, ‘मेटा मॉडल’ का इस्तेमाल करते हुए सवाल पूछने होंगे, आवश्यकता के अनुसार मिल्टन मॉडल का इस्तेमाल करना होगा । जहाँ जरूरी है, वहाँ ‘पॅटर्न इन्टरप्ट’ की भी मदद लेनी होगी । इतना सब करते हुए चेंज वर्क प्रोसेस में एन.एल.पी. की कौन सी तकनीक इस्तेमाल करनी है? इसके बारे में भी सोचना होगा । यह सब ऐसा ही होगा, जैसे कार चलाना सीखते वक्त हुआ था । उस समय भी शुरूआत में ढेर सारी चीजों को हमें एक साथ करना होता था । शुरू-शुरू में हम गाड़ी रोकना चाहते थे, तो गाड़ी आगे बढ़ जाती थी, हम ब्रेक लगाना चाहते थे, तो एक्सीलेटर पर पैर पड़ जाता था, इन सब के बीच कभी-कभी गियर अटकने लगते थे, बीच में ही गलती से वायपर शुरू हो जाते था । पर धीरे-धीरे हमारे अन्कॉन्शस मन ने चीजों को समझाना शुरू किया । चीजें कॉन्शस् लेवल से अन्कॉन्शस लेवल पर आती गयी और जैसे ही चीजें अन्कॉन्शस् लेवल पर आती हैं, हम उनमें माहिर बनते हैं ।

ऐसा ही कुछ होगा शुरुआती दिनों में जब आप एन.एल.पी. का इस्तेमाल करना शुरू करेंगे । शुरू-शुरू में शायद आपको ऐसा लग सकता है कि इतना सब मुझसे कैसे होगा? शायद आपको यह सब असंभव लगेगा, ऐसा लगेगा कि इतनी महारत हासिल करने में तो अनेक वर्ष लग जायेंगे । बहुत बार आप अनुभव करेंगे, कि आप सेन्सरी अक्युटी का इस्तेमाल करने लगते हैं, तो मेटा मॉडल का इस्तेमाल करना भूल जाते हैं, मिल्टन मॉडल इस्तेमाल करने लगते हैं, तो पॅटर्न इन्टरप्ट का समय निकल जाता है, या कभी-कभी ऐसा होगा कि कोचिंग सेशन के अंत तक आपको यहीं समझ में नहीं आएगा कि क्लाइंट की इस समस्या के लिए कौन सी एन.एल.पी. तकनीक इस्तेमाल की जाए? जो ट्रेनर्स, कोचेस्, लिडर्स, साइकोलॉजिस्ट, टीचर्स्, मॅनेजर्स् इ. एन.एल.पी. सीखते हैं, तो एन.एल.पी. स्किल्स् इस्तेमाल करने में शुरू-शुरू में सबको दिक्कत होती है । पर इससे विचलित होने की बिल्कुल जरूरत नहीं है, क्योंकि यह शुरुआती दौर है, जिस में ऐसा होना लाजमी है, इसीलिए हमारा फोकस इस बात पर रहेगा कि ट्रेनिंग के बाद किस प्रकार से जल्द से जल्द एन.एल.पी. स्किल्स् को कॉन्शस् इन्कॉम्पिटन्स लेवल से अन्कॉन्शस कॉम्पिटन्स लेवल पर लाया जाए ।

इसी लिए मैंने ट्रेनिंग के बाद तीस दिनों तक आपको होमवर्क सपोर्ट दिया है । हर दिन आपको सिर्फ पंद्रह मिनिट निकालकर उस दिन का होमवर्क करना है । कुछ दिन आपको एक्टिविटीज करनी होगी, शायद ऑडियो सुनना होगा, शायद रिव्हीजन होगी, दूसरों पर एन.एल.पी. तकनीकों का इस्तेमाल कर देखना होगा । ऐसा कुछ होगा, जो आपको ट्रेनिंग में सीखे हुए एन.एल.पी. स्किल्स को तराशने में, एन.एल.पी. में महारत हासिल करने में मदद करेगा । आपका तीस दिनों का होमवर्क सपोर्ट इतना आसान है कि आपको होमवर्क करने में सहजता महसूस होगी और मजा भी आएगा । आपने एन.एल.पी. ट्रेनिंग कोर्स में बिताए हुए यादगार पल आप फिर से अनुभव करेंगे । जो एकाध संकल्पना समझने में शायद आपको दिक्कत आयी हो, वह आप होमवर्क सपोर्ट एक्टिविटीज द्वारा सहजता से समझ पाएँगे । साथ ही आप इन प्रयोगों के बीच-बीच जब आप नोट्स रेफर करेंगे, तो आपकी समझ और गहरी होगी । सभी पोस्ट ट्रेनिंग सपोर्ट एक्टिविटीज को इसप्रकार से तैयार किया गया है कि हर एन.एल.पी. स्किल का अच्छी तरह से अभ्यास हो और रोजमर्रा की जिंदगी में उन स्किल्स् को इस्तेमाल करने में आपको आसानी हो ।

इन तीस दिनों में एन.एल.पी. स्किल्स् को कॉन्शस् लेवल से अन्कॉन्शस् लेवल तक ले जाने की हम पुरजोर कोशिश करते हैं । तीस दिनों तक हर रोज़ सिर्फ पंद्रह से बीस मिनिट आपको एन.एल.पी. में महारत हासिल करने में मदद करेंगे । पोस्ट ट्रेनिंग सपोर्ट का स्वरुप जानने हेतू यहाँ क्लिक करें

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