एन.एल.पी. सर्टिफिकेशन - कहानी के पीछे की कहानी

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एन.एल.पी. सर्टिफिकेशन - कहानी के पीछे की कहानी

जब मैंने पहली बार ‘एन.एल.पी. सर्टिफिकेशन’ गुगल किया, तो करीब 80 सेकंद में 5,00,000 से भी ज्यादा गुगल रिझल्टस् सामने आए । साथ ही साथ 5 से 7 गुगल एडस् भी दिखी । एन.एल.पी. ट्रेनिंग मुहैया कराने वाली ढेर सारी अलग-अलग वेबसाईटस् खुलने लगी । एन.एल.पी. पढ़ानेवालों का मानों ताता लग गया था । तकरीबन 50 से ज्यादा एन.एल.पी. ट्रेनिंग वेबसाइटस् को मैंने शुरू से अंत तक खंगाला । अब आगे मैं जो बतानेवाला हूँ, उसे पढ़कर आपको जरूर हैरानी होगी । आज की तारीख़ में पूरी दुनिया में 1000 से ज्यादा एन.एल.पी. ट्रेनिंग इंस्टिट्यूटस् हैं, एन.एल.पी. इस विषय पर तकरीबन 1200 से ज्यादा किताबें लिखी गई हैं, 50 से ज्यादा लोग ऐसे हैं, कि जिन्होंने सही मायने में एन.एल.पी. के विकास में सहयोग दिया है । ये सारे लोग अपने-अपने नाम से एन.एल.पी. वर्कशॉप्स चला रहे हैं । हैरान करनेवाली बात यह है, कि हर किसी का अलग सर्टिफिकेशन, अलग सिलॅबस, अलग ड्यूरेशन और अलग फ़ीस है । इस पर कुछ सवाल खड़े होते हैं, शायद आपके भी मन में ये सवाल जरूर आए हो, जैसे कि क्या एन.एल.पी. को रेग्युलेट करनेवाली कोई संस्था नहीं है? क्या एन.एल.पी. सीखानेवाली कोई ओरीजनल संस्था नहीं है? एक एन.एल.पी. सर्टिफिकेशन दूसरे से कैसे भिन्न है? कौन सा एन.एल.पी. सर्टिफिकेशन सर्वश्रेष्ठ माना जाता है? एन.एल.पी. सर्टिफिकेशन ट्रेनिंग को रेग्युलेट करने वाली सर्वोच्च संस्था कौन सी है? पर इन सवालों के जवाब ढूंढने से पूर्व हमें एन.एल.पी. सर्टिफिकेशन के कहानी के पीछे की कहानी को जानना जरूरी है ।

सन 1970 में रिचर्ड बॅन्डलर एवं जॉन ग्राइंडर ने एन.एल.पी. की संरचना की । शुरुआती दौर में एन.एल.पी. सायकोथेरपी के संदर्भ में इस्तेमाल होती थी और सीखनेवाले ज्यादातर साइकोलॉजी के क्षेत्र से थें । पर धीरे-धीरे एन.एल.पी. का विस्तार होने लगा, अलग-अलग क्षेत्रों में एन.एल.पी. की उपयोगिता साबित होने लगी, अलग-अलग क्षेत्रों से प्रतिभाशाली लोग जुड़ते गए, एन.एल.पी. को विकसित करने में मदद करने लगें, कारवां बनता गया और कहानी आगे बढ़ने लगी ।

अब साल था 1981 ! रिचर्ड बॅन्डलर एवं जॉन ग्राइंडर में किसी कारणवश अनबन हुई और दोनों के रास्ते अलग हुए । यह एन.एल.पी. कम्युनिटी में पहली दरार थी । सही मायने में कम्युनिटी बनने से पूर्व ही कम्युनिटी बिखर गई थी । जॉन ग्राइंडर ने स्वयं के एन.एल.पी. सर्टिफिकेशन कोर्सेस् शुरू किए, जिन में रिचर्ड बॅन्डलर को कोई हिस्सा नहीं दिया गया । इस पर नाराज होकर बॅन्डलर ने ग्राइंडर के खिलाफ कोर्ट में मुकदमा दायर किया । कई सालों तक मुकदमा चला और अंतिम निर्णय बॅन्डलर के पक्ष में आया । अंत में दोनों में एक समझौता हुआ, जिसके तहत ग्राइंडर को एन.एल.पी. सेमिनार लेने का दस साल का लायसेंस दिया गया । साथ में यह भी तय हुआ कि हर सेमिनार के बाद बॅन्डलर को रॉयल्टी दी जाएगी । उस समय ऐसा लगा कि शायद सब कुछ ठीक हो गया है और आपको भी लगा होगा कि कहानी खत्म हुई, पर नहीं, कहानी ने यहाँ से अलग ही मोड़ ले लिया ।

वर्ष 1996 में फिर से एक मुकदमा दायर हुआ । बॅन्डलर ने ग्राइंडर और एन.एल.पी. से जुड़े लगभग सारे बड़े ट्रेनर्स के खिलाफ कोर्ट में फिर से एक मुकदमा दायर किया । ऐसा कहा जाता है कि लगभग 200 से ज्यादा ट्रेनर्स के खिलाफ बॅन्डलर ने मुकदमा दायर किया था । बॅन्डलर का कहना था कि ये सारे एन.एल.पी. ट्रेनर्स एन.एल.पी. के नाम पर पैसा बना रहे हैं, पर एन.एल.पी. के ओरिजिनेटर होने के नाते मुझे रॉयल्टी के नाम पर कुछ नहीं मिल रहा है और अगर एन.एल.पी. की संरचना मैंने की है, तो मुझे रॉयल्टी मिलनी ही चाहिए । शायद आप यह जानकर चौंक जायेंगे कि जो मुकदमा हुआ और जो रॉयल्टी की रकम मांगी गई वह थी 10,000,000 डॉलर । कोर्ट का निर्णय आया । कोर्ट ने कहा कि बॅन्डलर ने एन.एल.पी. लायसेन्स का गलत अर्थ लगाया है । जिस रॉयल्टी की वे मांग कर रहे हैं, वे उसके हकदार नहीं हैं और फैसला इसबार बॅन्डलर के खिलाफ गया । अब कहानी ने एक और नया मोड़ लिया ।

वर्ष 2000 में बॅन्डलर और ग्राइंडर के बीच और एक समझौता हुआ, जिसके तहत दोनों को एन.एल.पी. का को-फाउंडर और को-क्रिएटर बताने पर सहमती बनी और साथ ही साथ यह भी तय हुआ कि दोनों एक दूसरे के प्रयासों को कमतर नहीं मानेंगे । अब यहाँ से कहानी अंतिम पड़ाव पर पहुँच चुकी थी । उस समझौते में यह भी तय हुआ कि एन.एल.पी. पर किसी एक की मालकीयत नहीं होगी तथा एन.एल.पी. सीखाने पर एवं लोगों को एन.एल.पी. में सर्टिफाय कराने पर कोई पाबंदी नहीं होगी । इसप्रकार से एन.एल.पी. से ट्रेडमार्क हट गया और एन.एल.पी. अलग-अलग लोगों की मालकियत से मुक्त हो गया । ऐसा लगा कि अब जाकर कहानी खत्म हुई । ऐसा होता तो अच्छा होता, पर अब यहाँ से एक नई कहानी की शुरूआत हुई ।

एन.एल.पी. से ट्रेडमार्क हटने के बाद अलग-अलग लोग एन.एल.पी. को अपने तरीके से विकसित करने लगें, एन.एल.पी. में नए मॉडल्स जोडे जाने लगें, अलग-अलग सर्टिफिकेशन्स् निर्मित होने लगें । इससे एक अच्छी बात यह हुई कि एन.एल.पी. का विकास होने लगा, अलग-अलग अच्छी चीजें जुड़ गई, जो गलत था वह पीछे छुटने लगा । अलग-अलग इंस्टीट्युटस् बनें, एन.एल.पी. बोर्डस् निर्मित हुए और दुनिया भर में एन.एल.पी. का प्रचार प्रसार होने लगा । एन.एल.पी. की मदद से लोगों के जीवन बदलने लगे, जो आदतें बदलने में जिंदगी निकल जाती थी, वे कुछ ही पलों में बदलने लगी, लोगों की जिंदगी बेहतर होने लगी । तो क्या यहाँ पर कहानी खत्म हुई? ‘नहीं’ इस एन.एल.पी. सर्टिफिकेशन की कहानी ने और एक मोड लिया ।

दुनिया को मानवी मस्तिष्क की विचारप्रक्रिया के परिवर्तन के लिए एन.एल.पी. के रूप में एक बेहतरीन रास्ता मिला, पर इससे एक गड़बड़ हुई, ढेर सारी एन.एल.पी. इंस्टीट्यूटस्, एन.एल.पी. कोर्सेस्, अलग-अलग सिलॅबस्, एन.एल.पी. ट्रेनर्स की फौज बनने लगी । सर्टिफिकेट बांटे जाने लगे । एन.एल.पी. का मूल स्पिरिट खत्म होने लगा । कहीं-कहीं तो एन.एल.पी. के नाम पर कुछ और ही सिखाया जाने लगा और इसीलिए अगर आप को एन.एल.पी. में स्वयं को ट्रेन करना है, तो बेहतरीन एन.एल.पी. ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट ढूंढना यह आपकी जिम्मेदारी बन गयी, पर यहाँ पर मैं आपकी थोड़ी सी मदद कर सकता हूँ, जिससे एन.एल.पी. सर्टिफिकेशन की कहानी उसके समाप्ति तक पहुंचे । तो एन.एल.पी. सर्टिफिकेशन करने से पूर्व नीचे दी गई कुछ बेहद महत्वपूर्ण बातों पर ध्यान देना जरूरी है ।

1. आपको एन.एल.पी. क्यों सीखना है?

इस सवाल पर गौर करें । आपको सही में सीखना है, या सिर्फ आपके नाम के आगे एन.एल.पी. प्रॅक्टिशनर लिखना है । अगर सिर्फ सर्टिफिकेट चाहिए, तो ऑनलाइन भी मिल जाएगा, वह भी सिर्फ पाँच सौ से एक हजार रूपये में । पर अगर आपको सही में एन.एल.पी. सीखना है, स्वयं को और दूसरों को जीवन परिवर्तन में मदद करनी है, जीवन के हर क्षेत्र में कामयाबी के बुलंदियों को छुना है, तो एक ऐसी ट्रेनिंग करें, जहाँ पर सही मायने में एन.एल.पी. सिखाया जाता हो और उनका सर्टिफिकेट भी सन्मानित हो ।

2. क्या एन.एल.पी. बोर्ड बेहतर है या एन.एल.पी. इंस्टीट्यूट?

अगर आप किसी एन.एल.पी. बोर्ड से दिया जानेवाले ट्रेनिंग करें, तो अच्छा होगा, क्योंकि ढेर सारी एन.एल.पी. इंस्टीट्यूट किसी बोर्ड के साथ टाय अप होती हैं, जो ट्रेनिंग के बाद आपको उस बोर्ड का सर्टिफिकेट मुहैया कराती हैं । इससे अच्छा आप सीधे एन.एल.पी. बोर्ड से ही ट्रेनिंग प्राप्त करें, जिससे एन.एल.पी. ट्रेनिंग की क्वॉलिटी बरकरार रहे और आगे चलकर आप उस एन.एल.पी. बोर्ड के ट्रेनर भी बन सकें ।  

इंडियन बोर्ड ऑफ़ हिप्नोसिस एंड न्यूरो-लिंग्विविस्टिक प्रोग्रामिंग (आइ.बी.एच.एन.एल.पी.) के बारे में अधिक जानने के लिए यहाँ क्लिक करें ।

3. एक ऐसा एन.एल.पी. बोर्ड ढूँढे जो आपको सीखाने में उत्सुक है, ना की सिर्फ सर्टिफिकेशन बेचने में ।

कोर्स करने से पूर्व एन.एल.पी. सर्टिफिकेशन कोर्स से जुड़ी सारी वेबसाईटस् ध्यान से चेक करें । वेबसाईट पर पढ़ने योग्य, एन.एल.पी. सीखने योग्य कितनी चीजें हैं और बेचने के लिए उपयुक्त कितनी है, इसपर थोड़ा ध्यान दें । ढेर सारी वेबसाईटस् सिर्फ एन.एल.पी. ट्रेनिंग कोर्सेस बेचने के लिए बनी होती है, इनसे थोड़ी दूरी बनाए रखना बेहतर होगा ।

4. एन.एल.पी. सिलॅबस् पर गौर करें ।

आज की तारीख में लगभग सभी एन.एल.पी. ट्रेनिंग इंस्टिट्यूटस् का एन.एल.पी. का सिलेबस तो कम ज्यादा एक सा ही होता है ।  पर एन.एल.पी. के साथ-साथ क्या कुछ नया सिखाया जा रहा है? क्या कुछ विशेष सिखाया जा रहा है? क्या कुछ बेहतर सिखाया जा रहा है? उसे थोड़ा ढूँढे, क्योंकि एन.एल.पी. के क्षेत्र में बहुत सारी नई चीजें हो रही है । दिन ब दिन साइकोलॉजी का विस्तार और विकास हो रहा है । तो क्या इन नई खोजों को आप सिलॅबस में ढूंढ पा रहे हैं?

आइ.बी.एच.एन.एल.पी. द्वारा आयोजित एन.एल.पी. प्रैक्टिशनर ट्रेनिंग वर्कशॉप का सिलेबस जानने के लिए यहाँ क्लिक करें ।

5. क्या जिस एन.एल.पी. ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट का चुनाव आप करने जा रहे हैं, वह एन.एल.पी. ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट या एन.एल.पी. ट्रेनिंग बोर्ड एन.एल.पी. रिसर्च में भी कुछ योगदान दे रहा है?

अगर ‘हाँ’ तो आपको बेहतर एन.एल.पी. ट्रेनिंग मिलने की उम्मीद बढ़ जाती है । बहुत बार कोई ट्रेनर एन.एल.पी. का कोर्स अटेंड कर आता है और सिखाना शुरू करता है, बिना उस पर गहन अध्ययन किए, इसीलिए रिसर्च में समाहीत हो, ऐसी जगह से ट्रेनिंग करना बेहतर होगा ।

6. क्या ट्रेनिंग के बाद एन.एल.पी. कौशल विकसित करने के लिए कोई मदद मिल रही है?

बहुत बार मदद के नाम पर कुछ पन्ने थमाए जाते हैं । याद रखना, एन.एल.पी. एक कौशल है, इसे सीखने में थोड़ा समय लगता है और अगर लगातार एन.एल.पी. बोर्ड से मदद मिलती रहे, तो सीखना आसान हो जाता है, नहीं तो बहुत बड़ी संभावना यह है कि आपके पास सर्टिफिकेट तो होगा, पर एन.एल.पी. में महारत नहीं होगी ।

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इसी लिए इन छह बातों का ध्यान रखें और एन.एल.पी. सीखकर स्वयं के और दूसरों के जीवन को रूपांतरित करें । तो क्या कहानी का अंत हुआ? हरगीज नहीं! अभी तो एक नई कहानी शुरू होगी, जब आप एन.एल.पी. सीखना शुरू करेंगे और जीवन में सफलता की बुलंदियों को छुएंगे ।

आई.बी.एच.एन.एल.पी. द्वारा आयोजित एन.एल.पी. ट्रेनिंग के प्रतिभागियों का अनुभव उन्हीं के शब्दों में सुनिए ।

आप भी चाहते होंगे कि आपका व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन सफलता की नई बुलंदियों को छुएं, तो निश्चित ही आप एन.एल. पी. के जादुई और ताकदवर तकनीकों को सीखने के लिए भी बेहद उत्सुक होंगे ।

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