एन.एल.पी. सीखना याने स्वयं में लड़ने के जज्बे को जगाना ।

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एन.एल.पी. सीखना याने स्वयं में लड़ने के जज्बे को जगाना ।

बीते कई वर्षों से मैं एन.एल.पी., हिप्नॉसिस, लाइफ कोचिंग, इमोशनल इंटेलिजेंस, सी.बी.टी., पर्सनॅलिटी डेवलपमेंट एवं साइकोलॉजी का एक अभ्यासक तथा ट्रेनर रहा हूँ । इन सब में एन.एल.पी. मुझे हमेशा से ही ज्यादा आकर्षित करता आया है, मैंने एन.एल.पी. के संदर्भ में बहुत सारी किताबें पढ़ी हैं, ढेर सारे ट्रेनर्स को सुना है, देखा है, सेंकडों ट्रेनर्स से मिला हूँ, पर सिर्फ कुछ गिने चुने ट्रेनर्स ऐसे हैं, जिन्होंने सही मायने में मेरे जीवन को आकार दिया, मुझे जीना सिखाया और सबसे अहम बात मुझ में लड़ने का ज़ज्बा जगाया । इन में रिचर्ड बॅन्डलर, एन्थनी रॉबिन्स, मायकेल हॉल, रॉबर्ट डिल्टस्, जोसेफ ओ. कनॉर इ. कुछ खास नाम शामिल है । इनसे ना सिर्फ मैंने एन.एल.पी. सीखा, किंतु मुझ में एन.एल.पी. की एक समझ खड़ी हुई, जीवन जीने का एक नया नजरिया मिला और सबसे महत्वपूर्ण बात, मुझ में समस्याओं से कभी हार न मानने का ज़ज्बा पैदा हुआ और अब यहीं लड़ने का ज़ज्बा एन.एल.पी. ट्रेनिंग के प्रतिभागियों में खड़ा करने का काम आज आइ.बी.एच.एन.एल.पी. कर रहा है ।

जब मैं भूतकाल में झाँकता हूँ, तो अचंबित हो जाता हूँ, क्योंकि एक समय था जब जिंदगी समस्याओं का पर्यायवाची शब्द बन चुका थी । कई बार मुझे ऐसा एहसास होता था, कि मानों जिंदगी अंतहीन समस्याओं की एक श्रृंखला है । एक समस्या खत्म नहीं हुई, कि दूसरी सामने आकर खड़ी होती थी । ऐसा लगता था कि जिंदगी खत्म हो जाएगी, परंतु समस्याएँ नहीं । किंतु एन.एल.पी. ने मुझे सिखाया, कि समस्याओं से ध्यान हटाकर लड़ने के जज्बे को मज़बूत करने में ताक़त लगाओ, स्वयं को बेहतर करने के लिए समय निकालो, स्वयं के भीतर छिपी हुई ताक़त को उजागर करने का प्रयास करो । जब मैंने एन.एल.पी. को जीवन में आजमाना शुरू किया, तब धीरे-धीरे मुझे एन.एल.पी. सीखने का मतलब मुझे समझ में आने लगा । मेरे लिए एन.एल.पी. सीखने का मतलब है, स्वयं के भीतर छिपे हुए लड़ने के जज्बे को जगाना और साथ ही साथ कुछ कर गुजरने के जुनून को निर्मित करना । एन.एल.पी. सीखना याने जिंदगी से बेतहाशा प्यार करना, जिंदगी के प्रति बेहद कुतूहल से भर जाना और लड़ने के लिए जरूरी जज्बे को जगाना । कुछ अलग और हटकर करना । जो कुछ करना है, उसे उत्साह के साथ करना । जिंदगी को ना सिर्फ जीना, पर उसे महसूस करना । एन.एल.पी. कोई थ्योरी नहीं है, एन.एल.पी. स्वयं के साथ और दूसरों के साथ सौहार्दपूर्ण संवाद को स्थापित करने की एक जादूई प्रक्रिया है, यह कोई तकनीक नहीं है, बल्कि हमारे मस्तिष्क के अविरत चलते कार्यविधी को सीखना है, उसमें महारत हासिल करना है, इसीलिए एन.एल.पी. समझना, याने एन.एल.पी. जीना है और एन.एल.पी. को जीना, याने स्वयं के भीतर लड़ने के जज्बे को जगाना है ।

दोस्तों, बहुत बार रोजमर्रा के जीवन की उठा पटक में हम समस्याओं से घिर जाते हैं, कभी हार न मानने की उस ताक़त को खोने लगते हैं, धीरे-धीरे लड़ने का वह ज़ज्बा खत्म होने लगता है, हम थक जाते हैं, अंदर से टूट जाते हैं, स्वयं की काबिलियत पर ही सवाल उठाने लगते हैं, अंत में परिस्थितियों से एडजस्ट करना सीख लेते हैं और अंत में जिंदगी में ऊँचा उठने की सनक गँवा बैठते हैं । पर क्या आपको लगता है कि उस ‘लड़ने के जज्बे’ को खोने से आपका जीवन सुखमय होगा? हरगीज नहीं । एक बात याद रखना,

- अगर जीवन है, तो समस्याएँ होगी ।

- अगर आप काम करेंगे, तो गलतियाँ होगी ।

- अगर आप उपर उठने का प्रयास करेंगे, तो गिरेंगे भी ।

याने आपके जीवन में समस्याएँ है, संघर्ष है, तो इसका मतलब ही यह हुआ कि आप जीवित है । खुशियाँ मनाएँ आप जीवित हैं, क्योंकि जो मर गए हैं, उनके लिए सारी समस्याएँ और संघर्ष खत्म हो गए हैं । याद रखना, हमारे जीवन के संघर्ष ही हमें जीवित होने का एहसास देते हैं । उन संघर्षों से लड़ने में ही जीवन छिपा है । वे संघर्ष ही प्रगति की डोर हैं । वे संघर्ष ही अंततः अपार आनंद के स्त्रोत बनते हैं, क्योंकि कामयाबी का स्वाद उन संघर्षों की तुलना में ही चखा जा सकता है । 

आपने शायद पूर्व हैवी वेट चॅम्पियन जेम्स् वाल्टर ब्रेडोक का नाम सुना होगा । उनका जीवन बचपन से ही समस्याओं से घिरा था, या आप ऐसा भी कह सकते हैं कि संघर्षों से उनका बहुत पुराना नाता रहा । जिंदगी बिल्कुल भी आसान नहीं थी, छोटी-छोटी जरूरतों को पूरा करने के लिए संघर्ष करना पड़ता था । बचपन में फुटबॉल प्लेयर बनने का सपना देखा था, पर वह पूरा न हो सका । इस टूटे हुए सपने का दर्द सीने में लिए हुए वे जी रहे थें और अचानक एक दिन बॉक्सिंग के प्रति आकर्षित हुए । बॉक्सिंग करने लगें, शुरुआती असफलताओं के बाद धीरे-धीरे लय में लौटे और जीत का आगाझ हुआ । अब बॉक्सिंग में करीयर बन रहा था, थोड़े बहुत पैसे भी हाथ आ रहे थें, लग रहा था कि अब आखिरकार संघर्षों से, समस्याओं से छुटकारा मिल ही गया । एक दिन वे हैवी वेट टायटल के लिए लड़ रहे थें, मुकाबला जोरदार हो रहा था, जीत की भरसक कोशिश हो रही थी, लड़ाई एकदम आरपार की थी, पर दुर्भाग्य से आखरी पलों में नसीब ने साथ नहीं दिया और जिंदगी का सबसे महत्वपूर्ण मुकाबला हार गए । इतना ही नहीं इस लड़ाई में उनका दाया हाथ कई जगह पर फ्रॅक्चर हुआ था और इसप्रकार करीयर का लगभग अंत हो चुका था ।

धीरे-धीरे स्थितियाँ बद से बदतर होती गयीं । वह दौर अमेरिका का ग्रेट डिप्रेशन या भयानक मंदी का था । जेम्स् को रोजगार नहीं मिल रहा था, हाथ में काम नहीं था, पैसे खत्म हो चुके थें, गरीबी से पूरा परिवार त्रस्त हो गया था । संघर्ष खत्म होने का नाम नहीं ले रहे थें । इतना ही नहीं प्रतिदिन संघर्ष और समस्याएँ बढ़ रही थीं । हर दिन नई समस्याएँ, एक समस्या खत्म होने से पूर्व दूसरी समस्या सामने आ खड़ी होती थी । रोजगार की तलाश में थें और आखिरकार काम मिला । काम था, सिर पर बोझ ढोने का । काम तो मिल गया, पर बोझ उठाने के लिए हाथ में ताक़त तो होनी चाहिए, क्योंकि फाईट में दाया हाथ कई जगह पर फ्रॅक्चर हुआ था । अंततः बाएँ हाथ से बोझ ढोने लगें । संघर्षों की श्रृंखला समाप्त नहीं हो रही थी ।

अब एक ही रास्ता बचा था, फिर से बॉक्सिंग में नसीब आजमाने का और इस प्रकार जेम्स् वाल्टर ने फिर से बॉक्सिंग के रिंग में कदम रखा । अब लड़ाई सिर्फ जीतने के लिए नहीं थी, अब स्वयं का अस्तित्व बचाना था, अब कुछ बड़ा करना था, स्वयं को सिध्द करना था और इसी ताक़त एवं निश्चय के साथ जेम्स् ने लड़ना शुरू किया, हर मुक्का पहले से ज्यादा ताक़तवर था, हर रणनीति पहले से ज्यादा सटीक थी, हर चाल पहले से ज्यादा बुद्धिमानी पूर्ण थी । पूरी ताक़त झोंक दी थी, हर फाईट मानों जिंदगी की आखरी फाईट थी और 1935 में चमत्कार हुआ, कुछ दिनों पूर्व बोझ ढोनेवाला मजदूर अमेरिकन बॉक्सिंग जगत का हैवी वेट चॅम्पियन बना था । जेम्स् वाल्टर ब्रेडोक ने इतिहास रचा था । सही मायने में कामयाबी का स्वाद चखा था ।

अब सवाल यह है कि ऐसा क्या है, जो जेम्स् वाल्टर को उन लाखों लोगों से अलग खड़ा करता है, जो जिंदगी से हार मान लेते हैं? जो लड़ने के बजाय भागने में यकिन करते हैं? जो जीत के लिए मेहनत करने की बजाय स्वयं की हार को स्वीकार कर लेते हैं? कुछ मुलभूत बातें हैं, जो जेम्स् वाल्टर को सामान्य लोगों से अलग खड़ा करती हैं । जेम्स् वाल्टर में एक ज़ज्बा था, कभी न हार मानने का ज़ज्बा । उन में जीत की भूख थी, उन्हें आशा थी कि एक दिन उनके सारे सपने साकार होंगे । वे समस्याओं से घिरे थें, पर फिर भी नजर समाधान पर थी । वे संघर्षों से मुकाबला करते हुए थके नहीं, उलटा उनका हर दिन नए उत्साह और जोश के साथ शुरू होता था । उन्हें उनकी खामियाँ पता थी, पर उन्होंने सारी ताक़त स्वयं को विकसित करने के लिए झोंक दी, इसीलिए समस्या और संघर्ष उन्हें कभी हरा ना सकें ।

क्या आपको भी स्वयं के व्यक्तित्व का ऐसा निर्माण करना है, जिस में आप जिंदगी के प्रति विलक्षण उत्सुकता से भरे हो, आपका हर दिन पूरे जोश के साथ शुरू हो, आपके सपनों से आप बेइंतेहा मोहब्बत करें, आप हर दिन कुछ नया सीखे, स्वयं के प्रति आत्मसन्मान हो, दूसरों के उपर प्यार हो, आप के पास लड़ने का ज़ज्बा हो, कभी हार न मानने की मनोदृष्टि हो? क्या आपको जिंदगी में सही मायने में ऊँचा उठना है? क्या आपको अपने भीतर छिपी ताक़त को जगाना है? क्या आपको ‘कभी हार न मानने’ के जज्बे को निर्मित करना है? अगर ‘हाँ’ तो एन.एल.पी. आपके लिए है । यहाँ से अनंत संभावनाओं के द्वार खुलते हैं । यहाँ पर सटीक रणनीति और ठोस कौशल सीखाए जाते हैं । यहाँ पर लड़ने के जज्बे को जगाया जाता है और यहीं हमारे लिए एन.एल.पी. का मतलब है ।

आई.बी.एच.एन.एल.पी. द्वारा आयोजित एन.एल.पी. ट्रेनिंग के प्रतिभागियों का अनुभव उन्हीं के शब्दों में सुनिए ।

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