सी.बी.टी. प्रॅक्टिशनर सर्टिफिकेशन कोर्स

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सी.बी.टी. प्रॅक्टिशनर सर्टिफिकेशन कोर्स

सी.बी.टी. प्रॅक्टिशनर सर्टिफिकेशन कोर्स के संबंध में बात करने से पूर्व कोचिंग सेशन के दरमियान का एक संवाद पढ़ते हैं । कोच और क्लाइंट के बीच के इस संवाद को पढ़ते हुए आपको क्लाइंट की सोच पर गौर करना है ।

 

क्लाइंट - मुझे नहीं लगता कि मुझसे कुछ हो पाएगा । अब मैं थक चुका हूँ, तंग आ चुका हूँ । एक बिजनेसमैन के तौर पर मैं पूरी तरह से असफल हो चुका हूँ ।

कोच - क्या आप मुझे थोड़ा विस्तार से बतायेंगे ?

क्लाइंट - पिछले साल तक मैं एक मल्टीनेशनल कंपनी में एच.आर. मैनेजर था । अच्छा खासा पैकेज ले रहा था, काम की जगह पर कोई परेशानी नहीं थी, सब कुछ ठीक चल रहा था । किंतु हर वक्त बिजनेसमैन बनने का मेरा पुराना सपना, मुझे अस्वस्थ कर देता था । मुझे बार-बार लगता था कि मुझे मेरे सपने को जीना चाहिए, किंतु एच.आर. मैनेजर के तौर पर मैं सिर्फ दिन काटने का काम कर रहा हूँ ।  मुझे कुछ करना चाहिए, एक्शन लेनी चाहिए, पहला कदम उठाना चाहिए और आखिरकार सालों के सोच विचार के बाद मैंने पिछले साल कंपनी को इस्तीफा थमा दिया और मेरी एच.आर. कंसलटन्सी फर्म शुरू की ।

कोच - आगे क्या हुआ?

क्लाइंट - कुछ नहीं । साल भर से प्रयास कर रहा हूँ किंतु सिर्फ असफलता ही हाथ आ रही है । मुझे नहीं लगता कि एच.आर. कंसलटिंग फर्म का बिजनेस चल पाएगा ।

कोच - कंसलटिंग फर्म के बिजनेस में सफलता हासिल करने के लिए आपने अब तक क्या-क्या किया है?

क्लाइंट - कंपनी से इस्तीफा देने के बाद मैंने एक ऑफिस रेंट पर लिया । तीन लोगों को काम पर रखा और मैंने एमएनसीज् में घूम कर ऑर्डर हासिल करना शुरू किया । शुरू-शुरू में कुछ बड़ी कंपनीयों की कंसलटिंग मैंने की, अच्छे खासे पैसे भी कमाए, किंतु पिछले 3 महीने से ऑर्डर मिलना ही बंद हो चुका है, अब सिर्फ दो-चार छोटी मोटी कंपनियों की कंसलटिंग कर रहा हूँ । मैं पूरी तरह से असफल हो चुका हूँ, मेरा बिजनेस खत्म हो चुका है, मुझे नहीं लगता कि भविष्य में भी मुझे कंसलटिंग की कोई आर्डर मिलेगी । मेरा कंपनी छोड़ने का फैसला आत्मघाती साबित हो चुका है । अब मेरे नाम के ऊपर नाकामयाबी का धब्बा लग चुका है ।

क्या आप इस क्लाइंट की मानसिकता को समझ पा रहे हैं?

वह किस तरह से सोच रहा है?

जिस तरह से क्लाइंट सोच रहा है, उस सोच को क्या हम कोई शीर्षक दे सकते हैं?

क्या क्लाइंट की इस सोच को बदला जा सकता है? अगर ‘हाँ’, तो किस तरह से?

सबसे पहले क्लाइंट की सोच के संबंध में विचार करते हैं ।

सामान्य रूप से क्लाइंट की सोच कुछ इस तरह है...

- मुझे नहीं लगता कि मुझसे कुछ हो पाएगा ।
- अब मैं थक चुका हूँ, तंग आ चुका हूँ ।
- एक बिजनेसमैन के तौर पर मैं पूरी तरह से असफल हो चुका हूँ ।
- मेरा बिजनेस खत्म हो चुका है ।
- मुझे नहीं लगता कि भविष्य में भी मुझे कंसलटिंग की कोई आर्डर मिलेगी ।
- अब मेरे नाम के ऊपर नाकामयाबी का धब्बा लग चुका है ।

 

क्या यह सोच सही है? क्या इस सोच की वजह से क्लाइंट जिंदगी में आगे बढ़ पाएगा? क्या इस तरह सोचने से क्लाइंट उसके कंसलटिंग बिजनेस में सफलता हासिल कर पाएगा? “हरगिज़ नहीं” ।

अगर आप क्लाइंट की बातों पर गौर करेंगे, तो आपको समझ में आएगा कि क्लाइंट को शुरुआती सफलता मिली है, बड़ी कंपनियों के आर्डर भी मिले हैं और आज की तारीख में वह तीन-चार कंपनियों की कंसलटिंग भी कर रहा है । इसका मतलब यह हुआ, क्लाइंट जो कह रहा है कि एक बिजनेसमैन के तौर पर वह पूरी तरह से असफल हो चुका हैं, यह सोच बुनियादी तौर वास्तविकता से दूर है ।

अगर सोचने के इस तरीके से क्लाइंट को हम निजात दिला पाते हैं और नई सकारात्मक सोच का तरीका सिखाते हैं, तो निश्चित ही क्लाइंट की जिंदगी में सकारात्मक परिवर्तन आ सकता है । वह फिर से नए लक्ष्य और ठोस योजना के साथ जिंदगी में आगे बढ़ सकता है, उसके कंसलटिंग बिजनेस को सफलता की बुलंदियों तक पहुँचा सकता है । क्लाइंट के सफल बिजनेसमैन बनने के सपने को जरूर पूरा किया जा सकता है, बशर्ते वह आत्मविश्वास और रचनात्मकता के साथ जीवन में आगे बढ़े और इसके लिए सबसे पहले हमें उसकी सोच को बदलना पड़ेगा । यह काम सी.बी.टी. के माध्यम से हम बेहद आराम से कर पाएँगे ।

क्लाइंट जिस तरह से सोच रहा है, उस सोच को सी.बी.टी. में ‘ऑल ऑर नथिंग’ थिंकिंग कहा जाता है । इस में क्लाइंट सोच के एकदम नकारात्मक सिरे पर चला जाता है, यानी उसकी सोच में अत्याधिक नकारात्मकता होती है, जो वास्तविकता से बहुत दूर होती है । इस अत्याधिक नकारात्मक सोच की वजह से नकारात्मक भावनाएँ निर्मित होती है, जिनके चलते नकारात्मक व्यवहार आकार लेता है । यहाँ पर क्लाइंट सोच के एक तो इस छोर पर होता है, या पूरी तरह से दूसरे छोर पर चला जाता है । उदाहरण के तौर पर, लोग एक तो आपसे प्यार करते हैं या आप का तिरस्कार करते हैं, एक तो आप पूरी तरह से स्वतंत्र होते हैं, या गुलाम होते हैं, इत्यादि ।

सी.बी.टी. में हम यह मानकर चलते हैं कि जिंदगी की कई सारी समस्याएँ हमारी थिंकिंग एरर या विचारों में की गई गलतियों से निर्मित होती है, जैसे कि इस क्लाइंट के साथ हो रहा है । सी.बी.टी. का सारा जोर इन थिंकिंग एरर्स् को नियंत्रित करने पर होता है, जिससे जिंदगी की तरफ देखने का हमारा नजरिया सकारात्मक रहे और खुशहाल जीवन का निर्माण हो सके ।

आप ही सोचिए, जिंदगी में कितनी बार हम सिर्फ गलत सोच के कारण कई सारी समस्याएँ निर्मित करते हैं । कई बार समस्या बहुत छोटी होती है, इसे आराम से सुलझाया जा सकता है, किंतु हम सोच-सोच कर उस समस्या को उलझा देते हैं । सी.बी.टी. हमारी सोच को जटिलता से सरलता की तरफ लेकर जाती है, जिससे हमारे विचार जिंदगी में समस्या निर्माण करने की जगह समाधान ढूंढने की कोशिश करने लगते हैं ।

सी.बी.टी. एक ताकतवर मनोवैज्ञानिक विधि है, जिसको सीखने के बाद आप अपने विचारों को नियंत्रित करते हुए उन्हें दिशा दे पाएँगे, खुशहाल जिंदगी का निर्माण कर पाएँगे और आत्मविश्वास के साथ जीवन में आगे बढ़ पाएँगे । सी.बी.टी. प्रॅक्टिशनर के इस कोर्स में आप कई सारी ताकतवर विधियाँ सीखेंगे, जिससे आप स्वयं के जीवन को बेहतर करते हुए, लोगों की मदद कर सकेंगे । उदाहरण के तौर पर...

- गलत सोच में छिपी हुई त्रुटियों को ढूंढना ।
- बेहद नकारात्मक विचारों को नियंत्रित करना ।
- सोच के प्रति जागरूकता बढ़ाना ।
- भावनाओं की रचना को समझना ।
- नकारात्मक विचारों को बदलना ।
- स्वस्थ धारणाओं का निर्माण करना ।
- आत्म अवधारणा को ताकतवर बनाना ।

 

सी.बी.टी. के एबीसी फॉर्मेट को रोजमर्रा की जिंदगी में लागू करना, इत्यादि ।

सी.बी.टी. प्रॅक्टिशनर सर्टिफिकेशन कोर्स में जब आप सी.बी.टी. की इन सारी ताकतवर विधियों को सीखेंगे, उनका गहन अध्ययन करेंगे और रोजमर्रा के जीवन में उनका इस्तेमाल करेंगे, तब जिंदगी के प्रति आपका दृष्टिकोण पूरी तरह से बदल जाएगा । आपके लिए व्यक्तिगत और व्यावसायिक परिवर्तन निर्मित करना बेहद सरल और आसान हो जाएगा ।

आय.बी.एच.एन.एल.पी. के एन.एल.पी. मास्टर और एन.एल.पी. मास्टर ट्रेनर कोर्स जो कि नौ दिनों का है, उस कोर्स के पाँचवे दिन हम सी.बी.टी. का अभ्यास करते हैं और बाकी बचे दिनों में सी.बी.टी. के अलग-अलग टूल्स् पर काम करते हैं । इसके साथ ही कई बार मुझसे यह सवाल पूछा जाता है कि आप एन.एल.पी. मास्टर और एन.एल.पी. मास्टर ट्रेनर कोर्स में सी.बी.टी. क्यों पढ़ाते हैं? असल बात यह है कि इस दुनिया की कोई भी थेरेपी या साइकोलॉजिकल टेक्निक अपने आप में संपूर्ण नहीं है, इसलिए अगर हम अलग-अलग थेरेपी या साइकोलॉजिकल टेकनिक्स का मिश्रण करें, तो ट्रेनिंग और कोचिंग में हम बेहतर परिणाम निर्मित कर सकते हैं ।

उदाहरण के तौर पर सी.बी.टी. ने ‘थिंकिंग एरर’ के संबंध में बहुत अच्छा काम किया है, हालांकि इन थिंकिंग एरर के कुछ पैटर्नस् हम एन.एल.पी. के मेटा मॉडल में सीखते हैं, फिर भी कुछ पैटर्नस् बच जाते हैं, जिसके चलते हमारे लिए सी.बी.टी. पढ़ना आवश्यक हो जाता है । इसके अलावा सी.बी.टी. ने एबीसी नाम से एक फॉर्मेट तैयार किया है, जिसके आधार से कोचिंग सेशन लेना बेहद आसान हो जाता है और सच कहूँ, तो इस तरह का कोई भी फॉरमैट एन.एल.पी. के पास नहीं है । इसलिए अगर हम सी.बी.टी. के इन टूल्स् का इस्तेमाल एन.एल.पी. के टूल्स् के साथ करते हैं, तो हम अपना जीवन परिवर्तित करते हुए, क्लाइंट को उसकी समस्याओं से जल्द और बेहतर तरीके से निजात दिला सकते हैं ।

अब कुछ पलों के लिए क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि सी.बी.टी. के इन शक्तिशाली टूल्स् के द्वारा आप कितने प्रभावी तरीके से ट्रेनिंग और कोचिंग सेशन चला सकते हैं । इससे आप सेशन में आने वाले लोगों के विचारों को पढ़ पाएँगे, उनकी नकारात्मक सोच को सकारात्मकता में परिवर्तित कर सकेंगे, उनमें आत्मविश्वास और बेहतर भविष्य निर्माण करने का जज्बा जगा पाएँगे । क्या आपको नहीं लगता कि इससे जादू हो जाएगा और आप जो सपना लेकर इस ट्रेनिंग में आए हैं, वह सपना भी पूरा होगा ।

(एन.एल.पी. मास्टर तथा एन.एल.पी. मास्टर ट्रेनर प्रोग्राम आई.बी.एच.एन.एल.पी. में एक व्यापक पाठ्यक्रम है, जिस में कम से कम 6 महीने का एक विशेष प्री-ट्रेनिंग कोर्स (वर्चुअल + असाइनमेंट फॉर्मेट में) तथा 9 दिनों तक 15-20 प्रतिभागियों के समूह में कक्षा प्रशिक्षण + 3 महीने के प्रोजेक्ट समाहित है । एन.एल.पी. मास्टर तथा एन.एल.पी. मास्टर ट्रेनर सर्टिफिकेशन कोर्स के प्रतिभागियों को सी.बी.टी., इमोशनल इंटेलिजेंस तथा कॉर्पोरेट ट्रेनर का नि: शुल्क प्रशिक्षण एवं  प्रमाणपत्र भी मिलेगा । इस कोर्स के सफल समापन के बाद, प्रतिभागियों को निम्नलिखित प्रमाणपत्रों से सम्मानित किया जाएगा:

1. एन.एल.पी. मास्टर

2. एन.एल.पी. मास्टर ट्रेनर

3. सी.बी.टी. प्रैक्टिशनर

4. इमोशनल इंटेलिजेंस कोच

5. कॉर्पोरेट ट्रेनर

उपरोक्त सर्टिफिकेशन कोर्सेस के लिए आवेदन करने से पूर्व मुंबई, पुणे, दिल्ली, अहमदाबाद या बैंगलोर में आई.बी.एच.एन.एल.पी. द्वारा आयोजित एन.एल.पी. प्रॅक्टिशनर सर्टिफिकेशन कोर्स को पूरा करना अनिवार्य है । भारत के उपर्युक्त सभी शहरों में एन.एल.पी. प्रॅक्टिशनर प्रशिक्षण के नियमित बैचेस आयोजित किए जाते हैं । आई.बी.एच.एन.एल.पी. में एन.एल.पी. प्रॅक्टिशनर प्रशिक्षण के सफल समापन के बाद ही, कोई एन.एल.पी. मास्टर तथा  एन.एल.पी. ट्रेनर सर्टिफिकेशन कोर्सेस के लिए आवेदन कर सकता है । यदि आप एन.एल.पी. मास्टर तथा एन.एल.पी. मास्टर ट्रेनर के रूप में अपना कैरियर बनाना चाहते हैं, तो आई.बी.एच.एन.एल.पी. अपनी सभी विशेष सुविधाओं के साथ अपनी यात्रा शुरू करने का सबसे अच्छा विकल्प होगा। जिन्होंने किसी अन्य एन.एल.पी.ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट से अपना एन.एल.पी. प्रॅक्टिशनर सर्टिफिकेशन कोर्स किया है, उन्हें आई.बी.एच.एन.एल.पी. में एन.एल.पी. प्रॅक्टिशनर ट्रेनिंग से अपनी यात्रा शुरू करनी होगी ।)

(अगर आप एन.एल.पी. प्रॅक्टिशनर कोर्स में एनरोल करते हैं, तो आइ.बी.एच.एन.एल.पी. की ओर से एन.एल.पी. प्रॅक्टिशनर सर्टिफिकेशन के साथ-साथ आपको हिप्नोसिस प्रॅक्टिशनर + एन.एल.पी. कोच + लाइफ कोच का ट्रेनिंग तथा सर्टिफिकेशन नि:शुल्क मिलेगा ।)

 

01. एन.एल.पी. ट्रेनिंग दिल्ली 25th July to 31st July 2024 in Delhi (Preparatory Course Registrations from 20th April 2024)
02. एन.एल.पी. ट्रेनिंग  पुणे -  25th  August to 31st  August  2023 in Pune (Preparatory Course Registrations from 20th May 2024)
03. एन.एल.पी. ट्रेनिंग मुंबई -   02nd October  to 08th October  2024 in Mumbai (Preparatory Course Registrations from 05th June 2024)
04. एन.एल.पी. ट्रेनिंग अहमदाबाद15th November  to 21st November  2024 in Ahmedabad (Preparatory Course Registrations from 15th July 2024)
05. एन.एल.पी. ट्रेनिंग बँगलोर –  01st December to 08th December 2024 in Bangalore (Preparatory Course Registrations from 01st August  2024)

 

कृपया अधिक जानकारी हेतू हमें संपर्क करें - +919834878870 या हमें [email protected] इस मेल आई डी पर मेल भेजें ।