एन.एल.पी. पोस्ट ट्रेनिंग सपोर्ट का महत्व

पोस्ट ट्रेनिंग सपोर्ट

विश्वनाथन आनंद । एक ऐसा नाम जिस पर हर भारतीय गर्वित महसूस करता है । शतरंज के खेल में आनंद ने सफलता ऐसा स्वाद चखा है, जो शायद ही किसी को नसीब होता है । सिर्फ भारत ही नहीं, किंतु पूरी दुनिया में आनंद ने शतरंज के खेल में उनकी प्रतिभा का डंका बजाया है । भारत सरकार ने भी राजीव गाँधी खेल रत्न, पद्म भूषण, पद्म श्री, पद्म विभूषण जैसे अनेक पुरस्कारों से उन्हें नवाज़ा है और इसी लिए आज हर भारतीय नागरिक विश्वनाथन आनंद को आदर तथा सम्मान की नजरों से देखता है ।

 

 

आनंद की माँ ने जब उन्हें शतरंज के खेल से रूबरू कराया था, तब उनकी उम्र महज 6 वर्ष की थी । इस छोटी सी उम्र से एक सफर शुरू हुआ, शतरंज का अभ्यास शुरू हुआ, एकाग्रता के साथ मस्तिष्क को तेज करने का प्रयास शुरू हुआ । समय के साथ अभ्यास बढ़ता गया और शतरंज की छोटी मोटी प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने का सिलसिला भी शुरू हुआ । कभी हार होती थी तो कभी जीत हासिल होती थी, किंतु हर हार और जीत के साथ शतरंज का अभ्यास ज्यादा तेज होता गया । अपने हुनर को सही मार्गदर्शन के अनुरूप तराशने का काम जारी था ।

अब उम्र हो चुकी थी 14 वर्ष, शतरंज का अभ्यास धीरे-धीरे रंग ला रहा था । शतरंज में आनंद का मस्तिष्क चीते जैसी तेज चाल चलने के लिए अभ्यस्त हो चुका था । उसी दौरान राष्ट्रीय स्तर पर एक बेहद महत्वपूर्ण प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा था । आनंद ने उस प्रतियोगिता में हिस्सा लेने का मन बना लिया और यही प्रतियोगिता आनंद के जीवन में मील का पत्थर साबित हुई । इस प्रतियोगिता में जीत का परचम लहराते हुए विश्वनाथन आनंद नेशनल सब जूनियर चेस चैंपियन बने ।

इस जीत ने उनके आत्मविश्वास को नई बुलंदियों तक पहुँचाया, अब पीछे मुड़ने का कोई सवाल ही नहीं था । एक रोमांचक सफर की शुरुआत हुई । अभ्यास तेज हुआ । एकाग्रता गहरी हुई और अगले ही वर्ष जब उनकी आयु 15 वर्ष थी, उन्होंने इंटरनेशनल जूनियर चेस मास्टर का खिताब जीता और वह पहले भारतीय बने, जिन्होंने इतनी कम उम्र में यह कारनामा कर दिखाया था । इसके अगले ही वर्ष यानी जब आनंद की आयु 16 वर्ष थी, वह नेशनल चेस चैंपियन बने और उसके अगले साल यानी 17 वर्ष की उम्र में उन्होंने वर्ल्ड जूनियर चैंपियन का खिताब अपने नाम किया । क्या आप यकीन कर पाएंगे कि उसके अगले ही वर्ष वह भारत के पहले ग्रैंड मास्टर बने? इसके साथ ही उसी वर्ष उन्हें पद्मश्री अवार्ड से नवाजा गया, जब उनकी उम्र थी सिर्फ 18 वर्ष ।

अब एक और आखरी सपना पूरा करना था, वर्ल्ड चेस चैंपियन बनने का और इस सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने कठोर परिश्रम उठाना शुरू किया । घंटों तक लगातार शतरंज का अभ्यास शुरू हुआ और धीरे-धीरे वर्ल्ड चेस चैंपियन बनने के इस सपने को पूरा करने की दिशा में कदम उठाए जाने लगे । जब सपना बड़ा होता है, तब जाहिर है कि ज्यादा मेहनत भी जरूरी होती है । अत्यधिक गहरे समर्पण और लगन की आवश्यकता होती है और फिर वह दिन आया, जब आनंद ने वर्ल्ड चेस चैंपियनशिप में हिस्सा लिया । अब तक सीखे सभी स्किल्स को दांव पर लगाते हुए उन्होंने जीतने की पुरजोर कोशिश की, किंतु दुर्भाग्यवश इस प्रतियोगिता में उनकी हार हुई । आपको यह जानकर ताज्जुब होगा कि अगले 12 सालों तक विश्वनाथन आनंद लगातार इस चैंपियनशिप को जीतने के लिए भरसक प्रयास करते रहे, किंतु हर बार असफलता ही हाथ लगी । फिर भी इन असफलताओं की शृंखला से विचलित होकर उन्होंने कभी हार नहीं मानी, ना ही वह पीछे हटे । इसके विपरीत उन्होंने और ज्यादा मेहनत की, और ज्यादा समय अभ्यास किया, पूरी लगन के साथ अपने सपने का पीछा करते रहे । आखिरकार वर्ष 2000 में, जब उनकी उम्र 31 वर्ष की थी, उनका वह सालों से संजोया हुआ सपना पूरा हुआ और वह वर्ल्ड चेस चैंपियन बने ।

क्या आप गौर कर पा रहा है, उनके सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने सालों तक मेहनत की । जब परिस्थितियाँ अनुकूल नहीं थी, तब भी उन्होंने अभ्यास बंद नहीं किया, आगे बढ़ने के जज्बे के साथ प्रयास करते रहे । अगर आप गौर करेंगे, तो पता चलेगा कि 6 वर्ष की आयु थी, जब शतरंज के खेल में चैंपियन बनने का सफर शुरू हुआ था और जब उनकी उम्र 31 वर्ष हुई, तब जाकर उन्होंने शतरंज की दुनिया का सबसे बड़ा खिताब ‘वर्ल्ड चेस चैंपियनशिप’ जीता । यानी लगभग 25 सालों का सफर और हजारों घंटों का अभ्यास । उनके इस सफ़र से उनकी मेहनत, एकाग्रता, हार न मानने का जज्बा, लगन तथा उच्च कोटी का समर्पण साफ झलकता है ।

आप भी विश्वनाथन आनंद जैसे आपके सपनों को पूरा कर सकते हैं, लंबी अवधि के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए योजना बना सकते हैं, तथा समर्पण के साथ जिंदगी में आगे बढ़ सकते हैं । यकीन मानिए, आप अपनी जिंदगी को जिस तरह से जीना चाह रहे हैं, ठीक उसी तरह से जी सकते हैं, जिंदगी का लुफ्त उठा सकते हैं और समाधान के साथ सफलता का स्वाद भी चख सकते हैं । आपके इन्हीं बड़े सपनों को पूरा करने के लिए आप आई.बी.एच.एन.एल.पी. के साथ एन.एल.पी., हिप्नोसिस तथा लाइफ कोचिंग सीख रहे हैं ।

यहाँ आपको एक महत्वपूर्ण बात याद रखनी होगी, कि एन.एल.पी. भी एक कौशल है स्वयं के मस्तिष्क को पूरी क्षमता एवं सकारात्मकता के साथ चलाने का और इस कौशल को सीखने के लिए, इसमें महारत हासिल करने के लिए आपको थोड़ी मेहनत करनी पड़ेगी, समय देना पड़ेगा, लगन के साथ अभ्यास करना पड़ेगा, क्योंकि आप इतने सालों से स्वयं के मस्तिष्क को एक विशिष्ट तरीके से चलाते आ रहे हैं, अब हम एन.एल.पी. के माध्यम से मस्तिष्क को चलाने के कुछ नए और बेहतर तरीके सीखेंगे, जिनकी मदद से आप स्वयं के जीवन पर नियंत्रण प्रस्थापित करते हुए, अपने सपनों को पूरा कर सकते हैं । इन नए पैटर्न्स को दृढ़ करने एवं आपकी जीवन शैली का हिस्सा बनाने में सजग प्रयास की आवश्यकता होगी । शायद इसके लिए थोड़ासा समय भी लग सकता है, अभ्यास की भी जरूरत पड़ सकती है पर मुझे यकीन है कि अगर आपने एन.एल.पी. सीखने के लिए आई.बी.एच.एन.एल.पी. को चुना है, तो इसका मतलब साफ है कि आपको एन.एल.पी. न केवल सीखना है, किंतु उसमें महारत हासिल करते हुए स्वयं के तथा दूसरों के जीवन को परिवर्तित भी करना है और इसके लिए आप मेहनत करने तथा समय देने के लिए भी जरूर तैयार होंगे ।

पर क्या सिर्फ समय देने से आप एन.एल.पी. में महारत हासिल कर पाएंगे? जैसे कि प्रोफेसर के. एरिक्सन कहते हैं, अगर आपको किसी विशिष्ट क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर की विशेषज्ञता या मास्टरी हासिल करनी है, तो आपको लगभग 10,000 घंटे अभ्यास करना पड़ेगा । किंतु अब सवाल यह है कि क्या सिर्फ 10,000 घंटे अभ्यास करने से आप उस क्षेत्र में विशेषज्ञ बन जाएंगे? क्या होगा अगर आप जो अभ्यास कर रहे हैं, उसे करने का आपका तरीका ही गलत है? जाहिर सी बात है, फिर 10,000 घंटे  की तो बात ही छोड़िए, अगर आपने जिंदगी भर भी अभ्यास किया, तो भी सफलता हासिल करना कठिन होगा ।

संक्षेप में, अगर आपको किसी भी क्षेत्र में महारत हासिल करनी है, तो उस क्षेत्र में जरूरी स्किल्स का अभ्यास करने के लिए आपको कुछ समय तो समर्पित करना ही पड़ेगा, किंतु उसके साथ ही अभ्यास करने की एक ठोस रणनीति भी आपके पास होनी चाहिए । जब आपका एन.एल.पी. प्रैक्टिशनर कोर्स खत्म होगा, तो उसके पश्चात् नियमित कम से कम एक महिने भर अभ्यास करने के लिए सिर्फ थोड़ासा समय निकालना होगा । आपको एक बेहतर और ठोस रणनीति प्रदान करने का काम मेरा होगा और इस रणनीति को ही मैं ‘पोस्ट ट्रेनिंग सपोर्ट’ कहता हूँ, जिसके पाँच हिस्से होंगे ।

1. एन.एल.पी. प्रैक्टिशनर वर्क बुक

2. मेटा मॉडल बुकलेट

3. मिल्टन मॉडल बुकलेट

4. लाइफ कोचिंग स्ट्रेटजी बुकलेट

5. पोस्ट ट्रेनिंग एक्टिविटी बुकलेट

अब इन पाँच हिस्सों के बारे में थोड़ी विस्तार से बात करते हैं ।

1. एन.एल.पी. प्रैक्टिशनर वर्कबुक : आप जब एन.एल.पी. ट्रेनिंग के लिए आएंगे, तब आपको पहले ही दिन एन.एल.पी. प्रैक्टिशनर वर्कबुक मिलेगा । वर्कशॉप के दौरान मैं जो कुछ भी आपको सिखाने वाला हूँ, उससे जुड़ी हुई सारी एक्टिविटीज इस वर्कबुक में है । हर दिन हम जिस टॉपिक को सीखेंगे, उससे जुड़ी एक्टिविटीज हम क्लास रूम में करेंगे और कुछ बची हुई एक्टिविटीज आपको उसी दिन घर जाने के बाद सोने से पहले पूरी करनी होगी । जिससे हर दिन मैं जो कुछ सिखा रहा हूँ, उसे आप पूरी तरह से ग्रहण कर पाएंगे । कोर्स खत्म होने के बाद, आपने इस वर्कबुक में जो कुछ लिखा है, वह आपके लिए पूरे कोर्स की रिवीजन के तौर पर काम करेगा । अगर आपने इस वर्कबुक का सही इस्तेमाल किया, जो एक्टिविटीज इस वर्कबुक में दी है, उन सारे एक्टिविटीज और एक्सरसाइजेज् को पूरा किया, तो मैं दावे के साथ कह सकता हूँ, कि कोर्स खत्म होने के महीनों बाद भी अगर आप इस वर्कबुक को खोलेंगे, तो एन.एल.पी. प्रैक्टिशनर वर्कशॉप में आपने जो एन.एल.पी. स्किल्स सीखे हैं, उन्हें कुछ ही समय में फिर से याद कर सकेंगे । कोर्स पूरा होने के बाद यह वर्कबुक एन.एल.पी. में मास्टरी प्राप्त करने के आपके सपने को पूरा करने के लिए सबसे जरूरी टूल होगा ।

2. मेटा मॉडल बुकलेट: यह बुकलेट आपको एन.एल.पी. के सबसे महत्वपूर्ण टॉपिक में महारत प्राप्त करने हेतु मदद करेगी । जब आप एन.एल.पी. की गहराईयों में उतरेंगे, तो आपको समझ में आएगा कि मेटा मॉडल एन.एल.पी. की बुनियाद है । असल में एन.एल.पी. की शुरुआत ही मेटा मॉडल के साथ हुई थी । जब रिचर्ड बैंडलर एवं जॉन ग्राइंडर, इन दोनों एन.एल.पी. के सह-संस्थापकों ने व्हरजीनिया सटायर एवं फ्रिटस् पर्ल्स् के थेरेपी सेशन्स का और उनमें इस्तेमाल होने वाले भाषा कौशल का निरीक्षण करना शुरू किया, तब असल में मेटा मॉडल के जरिए एन.एल.पी. ने इस दुनिया में दस्तक दी थी ।  1970 के दशक में थेरपी के जगत में ये दो हस्तियाँ बड़ी सहजता से उनके यहाँ आने वाले क्लाइंट्स के जीवन को परिवर्तित कर देते थे और यकीन मानिए, उनके थेरेपी सेशन्स किसी जादू से कम नहीं थे । अंतर्जगत की जिन समस्याओं को सुलझाने में एवं क्लाइंट के जीवन को सकारत्मक रूप से परिवर्तित करने में जहाँ बाकी थेरेपिस्ट तथा पारंपरिक मनोचिकित्सकों को सालों लग जाते थें, वही काम ये दोनों कुछ ही पलों में कर देते थें । जिस तरीके से व्हरजीनिया सटायर और फ्रिटस् पर्ल्स् उनके यहाँ आने वाले क्लाइंट से संवाद करते थे, उसका निरीक्षण करते हुए मेटा मॉडल के कुछ पैटर्न्स बनाए गए हैं, जिन्हें आप आई.बी.एच.एन.एल.पी. द्वारा आयोजित एन.एल.पी. प्रैक्टिशनर कोर्स में सीखते हैं । जिसके चलते आप भी अपने संवाद कौशल को जादुई और शक्तिशाली बना पाएँगे और यह बुकलेट इस लक्ष्य को प्राप्त करने में आपकी मदद करेगी ।

3. मिल्टन मॉडल बुकलेट - मेटा मॉडल बनने के बाद पूरे अमेरिका में एन.एल.पी. फांउडर्स ने मेटा मॉडल पढ़ाना शुरू किया और इसके साथ ही एन.एल.पी. का विस्तार होना भी शुरू हुआ । कुछ ही दिनों में एन.एल.पी. फांउडर्स भाषा के एक दूसरे जादूगर से मिले । भाषा का यह जादूगर व्हरजीनिया सटायर और फ्रिटस् पर्ल्स् के जैसे ही थेरेपी सेशन के जरिए लोगों के जीवन को परिवर्तित करने का काम करता था, किंतु इसके काम करने का अंदाज पूरी तरह से अलग था । यह जादूगर इतना शक्तिशाली था, कि क्लाइंट के समझ में आए बिना ही क्लाइंट की जिंदगी को बदलने की क्षमता रखता था । भाषा के इस जादूगर का नाम था मिल्टन इरिक्सन । मिल्टन इरिक्सन को कन्वरसेशनल हिप्नोसिस में महारत हासिल थी । उसकी रणनीतियों का अभ्यास करने के पश्चात् एन.एल.पी. का दूसरा मॉडल बना, जिसे नाम दिया गया ‘मिल्टन मॉडल’ । इस मॉडल के इस्तेमाल से आप भाषा का कुछ इस तरह से इस्तेमाल कर पाएँगे, जिससे सुनने वाले का कॉन्शियस माइंड रूक जाए एवं आप जो सकारात्मक सुझाव उसे दे रहे हैं, वे उसके सबकॉन्शियस माइंड में स्थिर हो जाए । इसी कौशल में महारत हासिल करने के लिए ‘मिल्टन मॉडल बुकलेट’, आप एन.एल.पी. प्रैक्टिशनर कोर्स का जो ट्रेनिंग वर्कशॉप अटेंड करेंगे, उसके बाद अभ्यास करते समय आपकी मदद करेगी ।

4.  लाइफ कोचिंग स्ट्रेटजी बुकलेट - आसान शब्दों में लाइफ कोचिंग का मतलब है, एक ऐसी कोचिंग प्रोसेस जिसमें कोच और क्लाइंट दोनों मिलकर एक ऐसे वातावरण का निर्माण करते हैं, जहाँ पर परस्पर विश्वास के साथ ‘किस तरह से जल्द सीखा जाए?’ यह सीखना होता है । लाइफ कोच अपने क्लाइंट्स को उनके लक्ष्यों को सटीकता से पहचानने में मदद करता है, इतना ही नहीं, तो दोनों मिलकर एक परियोजना बनाते हैं, जिससे उन लक्ष्यों तक जल्द और सरलता से पहुँचा जा सके ।

अगर आप लाइफ कोचिंग की इस व्याख्या पर गौर करेंगे, तो आपको दिखाई देगा कि लाइफ कोच ट्रेनिंग के दौरान, जो कि हमारे एन.एल.पी. प्रैक्टिशनर सर्टिफिकेशन कोर्स का हिस्सा है, आप जो लाइफ कोचिंग के कौशल सीखेंगे, वे ना सिर्फ आपको पेशेवर तरीके से कोचिंग करने के लिए मदद करेंगे, किंतु इसके साथ आप अपने परिवार के लोगों की, रिश्तेदारों की, मित्रों की जिंदगी में परिवर्तन ला सकेंगे । असल में लाइफ कोच बनने की यह ट्रेनिंग आपके व्यक्तिगत तथा सामाजिक जीवन को बेहतर करने में अमूल्य योगदान दे सकती है और लाइफ कोचिंग स्ट्रेटजी बुकलेट में आपको उन सारी रणनीतियों तथा सिद्धांतों से अवगत कराया जाएगा, जिनकी बदौलत एन.एल.पी. प्रैक्टिशनर ट्रेनिंग के बाद आप पेशेवर तरीके से कोचिंग या काउंसलिंग शुरु कर सकते हैं तथा आपके आसपास के लोगों की मदद कर सकते हैं ।

5. पोस्ट ट्रेनिंग एक्टिविटी बुकलेट – आई.बी.एच.एन.एल.पी. में हमने जो पोस्ट ट्रेनिंग सपोर्ट की व्यवस्था बनाई है, उसके यथोचित अनुसरण से आपको एन.एल.पी. में मास्टरी हासिल करना आसान होगा और एन.एल.पी. ट्रेनिंग के बाद भी आपकी एन.एल.पी. की पढ़ाई जारी रहेगी । आपने जो अलग-अलग मोटिवेशनल या पर्सनालिटी डेवलपमेंट के  ट्रेनिंग वर्कशॉप्स अटेंड किये होंगे, उनकी तरह एन.एल.पी. ट्रेनिंग वर्कशॉप भी एक अस्थायी समाधान या प्लेसबो इफ़ेक्ट नहीं बनेगा । एन.एल.पी. स्पिरिट आपके जेहन में उतरे,  इस के लिए यह एक्टिविटी बुकलेट बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी । इस बुकलेट में आपको एन.एल.पी. के हर टॉपिक पर आधारित ढेर सारी एक्टिविटीज् मिलेंगी, जिससे आपको एन.एल.पी. प्रैक्टिशनर कोर्स के दरमियान  आपने जो कुछ सीखा है, उसका अभ्यास करने में मदद होगी । उदाहरण के तौर पर एन.एल.पी. प्रैक्टिशनर ट्रेनिंग में हम स्टेट मैनेजमेंट नामक एक महत्वपूर्ण टॉपिक सीखते हैं । कोर्स खत्म होने के बाद जब आप अपने घर जाकर इस टॉपिक का अभ्यास करेंगे, तो आपको इस एक्टिविटी बुकलेट में इस टॉपिक से संबंधित कई सारी एक्टिविटीज् मिलेंगी, उन एक्टिविटीज् को किस तरीके से करना है? उसका विवरण भी इस बुकलेट में विस्तार से दिया हुआ है । आपको केवल किसी एक टॉपिक को निश्चित कर उसकी एक्टिविटी चुननी है और उसका अभ्यास शुरू करना है । जैसे कि स्टेट मैनेजमेंट इस टॉपिक से संबंधित एक एक्टिविटी है, जिसमें आपको अपनी ‘हबिच्युअल स्टेट’ यानी ‘हर रोज़ की आदतन मानसिकता’ को किस तरह से ढूंढना है और उसे किस तरीके से बदलना है? यह सिखाया जाएगा । मान लो कि किसी की हबिच्युअल स्टेट, खालीपन है । यानी वह इंसान दिन भर में ज्यादातर समय स्वयं के भीतर खालीपन महसूस करता है । अब इस एक्टिविटी के जरिए वह इन्सान अपनी ‘हबिच्युअल स्टेट’ यानी ‘दिन का ज्यादातर समय जिस मानसिकता में बिताते हैं’, उस मानसिकता को ढूंढ़ेगा और उसे बदलने का अभ्यास करेगा । यह कैसे करना है? इसका पूरा विवरण आपको पोस्ट ट्रेनिंग एक्टिविटी बुकलेट में मिलेगा । हर दिन बुकलेट में दिए हुए अलग-अलग टॉपिक्स में से आपको कोई भी एक टॉपिक चुनना है और उससे संबंधित एक्टिविटीज् का अभ्यास करना है । आप चाहे तो एक दिन में एक से ज्यादा एक्टिविटी भी कर सकते हैं । आमतौर पर किसी एक एक्टिविटी को करने के लिए आपको लगभग हर दिन सिर्फ 30 मिनट देने हैं, जिससे एन.एल.पी. में मास्टरी हासिल करने का आपका सपना साकार हो सकेगा ।

इस तरह से आई.बी.एच.एन.एल.पी. का एन.एल.पी. प्रैक्टिशनर पोस्ट ट्रेनिंग सपोर्ट आपकी मदद करेगा । यकीन मानिए, एन.एल.पी., हिप्नोसिस और लाइफ कोचिंग में मास्टरी हासिल करने के आपके सपने को आप जरूर पूरा कर सकते हैं, बशर्ते आप प्रामाणिकता और समर्पण के साथ इस पोस्ट ट्रेनिंग में दी हुई एक्टिविटीज का अभ्यास करें । यह पोस्ट ट्रेनिंग सपोर्ट आपके जीवन को पूरी तरह से बदल कर रख देगा, क्योंकि इन एक्टिविटीज् को करते हुए आप सजगता पूर्वक स्वयं के मस्तिष्क में परिवर्तन ला रहे हैं । आपके विचारों, भावनाओं तथा बर्ताव के सालों से चले आ रहे पैटर्न्स को बदल रहे हैं । आप अपने विचारों, भावनाओं के रूढ़ पैटर्न्स को उखाड़ फेंकने का एवं नए पैटर्न्स को आत्मसात करने का मस्तिष्क की कोषिकाओं को व्यायाम तथा अभ्यास करा रहे हैं । इसके अलावा पोस्ट ट्रेनिंग की ये एक्टिविटीज् आपको नई, सकारात्मक एवं प्रभावशाली धारणाओं को स्वयं के भीतर प्रोग्राम करने में मदद करेंगी, जिससे आपके बड़े सपने पूरे होंगे और आप सफलता का अनुभव करेंगे । अंत में, मैं आपका अभिनंदन करना चाहूँगा, आई.बी.एच.एन.एल.पी. द्वारा आयोजित एन.एल.पी. प्रैक्टिशनर कोर्स में दाखिला लेने के लिए और स्वयं के जीवन को परिवर्तित करने हेतु एन.एल.पी. सीखने का निर्णय लेने के लिए ।

आप भी चाहते होंगे कि आपका व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन सफलता की नई बुलंदियों को छुएं, तो निश्चित ही आप एन.एल. पी. के जादुई और ताकदवर तकनीकों को सीखने के लिए भी बेहद उत्सुक होंगे ।

एन.एल.पी. कोर्सेस के बारे में जानने के लिए यहाँ क्लिक करें, या मुंबई, पुणे, दिल्ली, अहमदाबाद या बैंगलोर में एन.एल.पी. प्रैक्टिशनर प्रशिक्षण में भाग लेने के लिए हमें आज ही संपर्क करें - +919834878870 या हमें लिखिए [email protected]

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