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NLP Certification in India

एनएलपी प्रॅक्टिशनर के बाद पोस्ट ट्रेनिंग सपोर्ट का महत्त्व

Post NLP Training Support 08

फोर व्हिलर सीखते वक्त मुझे जो अनुभव हुआ, मुझे पता नहीं अपको भी वैसा ही अनुभव हुआ होगा, या नहीं, अगर नहीं, तो आप कल्पना तो जरूर कर सकते हैं कि वह अनुभव कैसा होगा ।

जब मैंने पहली बार फोर व्हिलर सीखने का प्रयास किया वह दिन मुझे आज भी याद है । सुबह का वक्त था जब मैंने पहली बार कार का स्टेरींग अपने हांथों में लिया था । वह दिन था 18 अक्टूबर, मेरे दोस्त का जन्मदिन था । सुबह की ताजगी और उल्हास को मैं अनुभव कर रहा था । आकाश में बादल न के बराबर थें, मानों किसी ने नीले रंग से आकाश को भर दिया हो । जिस रास्ते से मैं कार चलानेवाला था, वैसे तो उस रास्ते पर शांती बनी रहती थी । उस दिन पहली बार में ड्रायव्हिंग सीट पर बैठा था । सामने उस खाली रास्ते को देख रहा था । मेरा दोस्त मुझे कुछ सूचनाएँ दे रहा था, जिसे मैं ध्यान से सुन रहा था । मेरे हाथ स्टेरिंग व्हिल पर थें, आहिस्ता से चाबी घुमाई और गाड़ी शुरू हुई । एक अजीब सा एहसास हो रहा था, शरीर में एक उत्तेजना थी, पर थोड़ा नर्व्हस महसूस कर रहा था ।

वह एक यादगार दिन था, अगर आपने भी कभी कार चलाना सीखा होगा, तो वे शुरुवाती दिन आपके लिए भी यादगार रहे होंगे । मैं हर गुजरते चीज के प्रति जागरूक था, चाहे वे पेड़ हो, या रास्ते से गुजरनेवाली गाड़ियाँ । इतना ही नहीं, उस दिन तो मुझे रास्ते के किनारे पड़े छोटे मोटे पत्थर भी दिखाई दे रहे थें । शायद जिंदगी में पहलीबार मैंने इतनी अवेयरनेस की अनुभूती की थी । वह कार चलाना सीखना एक अभूतपूर्व अनुभव था । मेरे पूरा फोकस गाड़ी चलाने पर था, मानों मेरा शरीर और मन एक हो गया हो ।

धीरे धीरे कार आगे बढ़ रही थी, मुझे ऐसा एहसास हो रहा था कि जैसे मैं मेरे जीवन में आगे बढ़ रहा हूँ, जीत  का परचम लहरा रहा हूँ, उस वक्त मुझे स्वयं के प्रति अच्छा महसूस हो रहा था । कितनी सारी चीजें मैं एक साथ कर रहा था । स्टेरींग व्हिल, गियर, क्लच, ब्रेक, मेरे दोस्त की सूचनाएँ । शुरूवात में यह सब असंभव लग रहा था । कितना कठिन था वह सब एक साथ करना । भविष्य में मैं कभी आराम से गाड़ी चला पाउँगा, इसकी कल्पना करना भी उस वक्त मुश्किल लग रहा था । कितना अलग और बेहतरीन अनुभव था । पर जैसे जैसे वक्त बीतता गया, वैसे वैसे गाड़ी चलाना महज एक खेल बन गया । आज जब में अच्छे से गाड़ी चला रहा हूँ, तब भी यहीं सारी चीजें हो रही हैं, स्टेरींग व्हिल, गियर, क्लच, ब्रेक, साथ में बैठे दोस्त के साथ गपशप, पर अब यह सब अन्कॉन्शस् लेवल पर हो रहा है । इसके लिए अब मुझे पहले जैसा प्रयास नहीं करना पड़ता । आज यह सब बड़े आराम से हो रहा है, अब मैं गाड़ी चलाना एन्जॉय कर रहा हूँ । अगर आप भी इस अनुभव से गुजरे हैं, तो आप को भी पता होगा कि आज भी आप वहीं सब कुछ कर रहे हैं, जो आपने पहले दिन किया था । पर तब में और अब में सिर्फ एक फर्क है, तब चीजें कॉन्शस् लेवल पर थीं और आज चीजें अन्कॉन्शस् लेवल पर है ।

एनएलपी सीखते वक्त ठीक ऐसा ही होगा । छह दिनों में आप ढेर सारे सिक्लस् सीखेंगे, लगभग बीस के करीब और ये सारे एनएलपी स्किल्स् आपको आपके और दूसरों के जीवन को परिवर्तित करने में मदद करेंगे । हम एक एक स्किल अलग अलग सीखेंगे, पर आखरी दिन हम सारे स्किल्स् को एकत्रित करते हुए एनएलपी का पूरा चित्र समझने की कोशिश करेंगे । जैसे कि अगर आप कोचिंग कर रहे हैं, तो सबसे पहले आपको ‘पीक स्टेट’ में आना होगा, क्लायंट से बात करते हुए आपको आपकी सेन्सरी अक्युटी का इस्तेमाल करना होगा, ‘मेटा मॉडल’ के हिसाब से प्रश्न पूछने होंगे, जरूरत के हिसाब से मिल्टन मॉडल इस्तेमाल करना होगा, जहाँ जरूरी है, वहाँ पॅटर्न इन्टरप्ट का इस्तेमाल करना होगा, इतना सब करते हुए चेंज वर्क में एनएलपी की कौनसी तकनीक इस्तेमाल करनी है, इसके बारे में भी सोचना होगा । यह सब ऐसा ही है, जैसे कार चलाना सीखते वक्त होता है । उस वक्त भी शुरूवात में ढेर सारी चीजों को हमें एक साथ करना होता है । शुरू शुरू में हम गाड़ी रोकना चाहते हैं, तो गाड़ी आगे बढ़ती है, हम ब्रेक लगाना चाहते हैं, तो एक्सीलेटर पर पैर पड़ जाता है, गियर अटकने लगते हैं, बीच में ही गलती से वायपर शुरू हो जाते हैं । पर धीरे धीरे चीजें कॉन्शस् लेवल से अन्कॉन्शस लेवल पर आना शुरू होता है और जैसे ही चीजें अन्कॉन्शस् लेवलपर आती हैं, हम उसमें माहिर बनते हैं ।

ऐसा ही कुछ होगा शुरुवाती दिनों में जब आप एनएलपी का इस्तेमाल शुरू करेंगे । शुरू शुरू में शायद आपको ऐसा लग सकता है कि इतना सब कैसे होगा, शायद आपको यह सब असंभव लगेगा, ऐसा लगेगा कि इतनी महारत हासील करने में तो सालों लग जायेंगे । जैसे कि, आप सेन्सरी अक्युटी का इस्तेमाल करने लगेंगे, तो मेटा मॉडल का इस्तेमाल करना भूल जायेंगे, मिल्टन मॉडल इस्तेमाल करने लगेंगे, तो पॅटर्न इन्टरप्ट का समय शायद निकल जाएगा, या कभी कभी ऐसा होगा कि कोचिंग सेशन के अंत तक आपको यहीं समझ में नहीं आएगा कि इसके लिए कौनसी एनएलपी तकनीक का इस्तेमाल किया जाए । जो ट्रेनर्स, कोचेस्, लिडर्स्, साइकोलॉजीस्ट, टिचर्स्, मॅनेजर्स् इ. एनएपली सीखते हैं, तो एनएलपी सिक्लस् इस्तेमाल करने में शुरू शुरू में सबको दिक्कत होती है । पर इससे विचलित होने की जरूरत बिलकूल नहीं है, क्योंकि यह शुरुवाती दौर है, जिसमें ऐसा होना लाजमी है, इसीलिए हमारा फोकस इस बात पर रहेगा कि ट्रेनिंग के बाद किसप्रकार से जल्द से जल्द एनएलपी स्किल्स् को कॉन्शस् लेवल से अन्कॉन्शस लेवलपर लाया जाए ।

इसीलिए मैंने ट्रेनिंग के बाद तीस दिनों तक आपको होमवर्क सपोर्ट दिया है । हर दिन आपको सिर्फ पंधरा मिनिट निकालकर उस दिन का होमवर्क करना है । कुछ दिन आपको अॅक्टीव्हिटीज करनी होगी, शायद ऑडियो सुनना होगा, शायद रिव्हीजन होगी । ऐसा कुछ होगा जो आपको ट्रेनिंग में जो सीखा है, उसमें महारत हासील करने में मदद करेगा । आपका तीस दिनों का होमवर्क सपोर्ट इतना आसान है कि आपको होमवर्क करने में सहूलीयत होगी और मजा भी आएगा । अॅक्टीव्हिटीज को इसप्रकार से तैयार किया है जिससे हर स्किल का अभ्यास हो और रोजमर्रा की जिंदगी में उस सिक्ल को इस्तेमाल करने में आपको आसानी हो ।

इन तीस दिनों में एनएलपी स्किल्स् को कॉन्शस् लेवल से अन्कॉन्शस् लेवलपर ले जाने की हम पुरजोर कोशिश करेंगे । तीस दिनों तक हररोज सिर्फ पंधरा मिनिट, आपको एनएलपी में महारत हासील करने में आपकी मदद करेंगे । पोस्ट ट्रेनिंग सपोर्ट का डेमो देखने हेतू यहाँ क्लिक करें

Sandip Shirsat NLP Master Trainer
Sandip Shirsat

CEO & Founder of Indian Board of Hypnosis & Neuro Linguistic Programming

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