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NLP Certification in India

एनएलपी सीखना याने स्वयं में लड़ने के जस्बे को जगाना

use of NLP 07

बीते कई सालों से मैं एनएलपी, हिप्नॉसिस, पर्सनॅलिटी डिव्हेलपमेंट, साइकोलॉजी का अभ्यास कर रहा हूँ । बहुत सारी किताबें पढ़ी हैं, ढेर सारे ट्रेनर्स को सुना है, सेंकडों को मिला हूँ, पर सिर्फ कुछ गिने चुने ट्रेनर्स ऐसे है, जिन्होंने सही माइने में मेरे जीवन को आकार दिया, मुझे जिना सिखाया और सबसे अहम बात मुझमें लड़ने  का जस्बा जगाया । इन में रिचर्ड बॅन्डलर, अॅन्थनी रॉबिन्स, मायकेल हॉल, रॉबर्ट डिल्टस्, जोसेफ ओ कनॉर इ. कुछ खास है । इनसे ना सिर्फ मैंने एनएलपी सीखा, किंतु मुझ में एनएलपी की एक समझ खड़ी हुई, जीवन जीने का एक नया नजरीया मिला और सबसे महत्वपूर्ण बात मुझमें समस्याओं से कभी हार न मानने का जस्बा पैदा हुआ और अब यहीं लड़ने का जस्बा खड़ा करने का काम आयबीएचएनएलपी कर रहा है ।

जब मैं भूतकाल में झाँकता हूँ, तो चौक जाता हूँ, क्योंकि उस वक्त जिंदगी समस्याओं का दूसरा नाम बन चुकी थी । उस समय कई बार मुझे ऐसा एहसास होता था, कि मानों जिंदगी एक ना खत्म होने वाली समस्याओं की श्रृंखला है, एक समस्या खत्म नहीं हुई, कि दूसरी सामने आकर खड़ी होती है, ऐसा लगता है कि जिंदगी खत्म हो जाएगी परंतु समस्याएँ नहीं । किंतु एनएलपी ने मुझे सिखाया, कि समस्याओं से फोकस हटाकर लड़ने के जस्बे को मजबुत करने में ताकद लगाओ, स्वयं को बेहतर करने के लिए समय निकालो, स्वयं के भीतर छिपी हुई ताकद को उजागर करने का प्रयास करो । धीरे धीरे एनएलपी सीखने का मतलब मुझे समझ में आने लगा, एनएलपी सीखने का मतलब है स्वयं के भीतर छिपे हुए लड़ने  के जस्बे को जगाना और साथ ही साथ कुछ कर गुजरनेके जुनून को निर्मित करना । एनएलपी सीखना याने जिंदगी से पागलो की तरह प्यार करना, जिंदगी के प्रति बेहद कुतूहल से भर जाना और लड़ने का कभी न खत्म होनेवाले जस्बे को जगाना । कुछ अलग और हटकर करना, जो कुछ करना है उसे उत्साह के साथ करना, जिंदगी को ना सिर्फ जिना पर उसे महसूस करना । एनएलपी कोई थेअरी नहीं है, एनएलपी स्वयं के साथ और दूसरों के साथ संवाद को स्थापित करने की एक जादूई प्रक्रिया है, यह कोई तकनीक नहीं है, बल्कि हमारे दिमाग की जीवंत कार्यविधी को सीखना है, उसमें महारत हासील करना है और इसीलिए एनएलपी समझना याने एनएलपी जीना है और एनएलपी को जीना याने स्वयं के भीतर लड़ने के जस्बे को जगाना है ।

दोस्तों, बहुत बार जिंदगी की उठा पटक में हम समस्याओं से घिर जाते हैं, कभी हार न मानने की उस ताकद को खोने लगते हैं, धीरे धीरे लड़ने का जस्बा खत्म होने लगता है, जिंदगी से हम अॅडजस्ट करना सीख लेते हैं और अंत में जिंदगी में ऊँचा उठने की सनक को हम गँवाने लगते हैं । पर क्या आपको लगता है कि उस ‘लड़ने के जस्बे’ को खोने से आपका जीवन सुखमय होगा? हरगीज नहीं । एक बात याद रखना, अगर जीवन है तो समस्याएँ होंगी, अगर आप काम करेंगे तो गलतियाँ होंगी, अगर आप उपर उठने का प्रयास करेंगे तो गिरेंगे भी । याने आपके जीवन में समस्याएँ है, संघर्ष है, तो इसका मतलब ही यह हुआ कि आप जीवित है । खुशियाँ मनाएँ आप जीवित हैं, क्योंकि जो मर गए हैं, उनके लिए सारी समस्याएँ और संघर्ष खत्म हो गए हैं । याद रखना हमारे जीवन के संघर्ष ही हमें जीवित होने का एहसास देते हैं । उन संघर्षों से  लड़ने में ही जीवन छिपा है, वे संघर्ष ही प्रगति की डोर हैं, वे संघर्ष ही अंततः अपार आनंद का स्त्रोत है क्योंकि उन संघर्षों से कामयाबी का स्वाद चखा जा सकता है । 

आपने शायद पूर्व हेविवेट चॅम्पीयन जेम्स् वॅल्टर का नाम सुना होगा । उनका जीवन बचपन से ही समस्याओं से घिरा था, संघर्षों से उनका पुराना नाता था । जिंदगी बिलकुल भी आसान नहीं थी, छोटी छोटी जरूरतों को पूरा करने के लिए संघर्ष करना पड़ता था । बचपन में फुटबॉल प्लेयर बनने का सपना देखा था, पर वह पूरा न हो सका । इस टुटे हुए सपने का दर्द सीने में लिए हुए जी रहे थें और अचानक एक दिन बॉक्सिंग के प्रति आकर्षित हुए । बॉक्सिंग करने लगें, शुरुवाती असफलताओं के बाद धीरे धीरे लय में लौटे और जित का आगाझ हुआ । अब बॉक्सिंग में करीयर बन रहा था, थोड़े बहुत पैसे भी हाथ आ रहे थें, लग रहा था कि  अब आखिरकार संघर्षों से, समस्याओं से छुटकारा मिल ही गया । अब हेविवेट टायटल के लिए लड़ रहे थें, मुकाबला जोरदार हुआ, जीत की भरसक कोशिश हो रही थी, लड़ाई एकदम करीबी थी, पर दुर्भाग्य से आखरी पलों में नसीब ने साथ नहीं दिया और जिंदगी का सबसे महत्वपूर्ण मुकाबला हार गए । इतना ही नहीं इस लड़ाई में उनका दाया हाथ कई जगह पर फ्रॅक्चर हुआ था और इसप्रकार करीयर का लगभग अंत हो चुका था ।

धीरे धीरे स्थितियाँ बदतर होती गयीं । वह दौर अमेरीका का ग्रेट डिप्रेशन या भयानक मंदी का था । जेम्स् को रोजगार नहीं मिल रहा था, हाथ में काम नहीं था, पैसे खत्म हो चुके थें, गरीबी से पूरा परीवार जूंज़ रहा था । संघर्ष खत्म होने का नाम नहीं ले रहे थें । इतना ही नहीं प्रतिदिन संघर्ष और समस्याएँ बढ़ रही थीं । हर दिन नई समस्याएँ, एक समस्या खत्म होने से पूर्व दूसरी समस्या का मुकाबला करना पड़ता था । रोजगार की तलाश में थें और आखिरकार काम मिला, काम था सिर पर बोझ ढोने का । काम तो मिल गया, पर बोझ उठाने के लिए हाथ में ताकद तो होनी चाहिए, क्योंकि फाईट में दाया हाथ कई जगह पर फ्रॅक्चर हुआ था । अंततः बाएँ हाथ से बोझ ढोने लगें । संघर्षों की श्रृंखला समाप्त नहीं हो रही थी ।

अब एक ही रास्ता बचा था, फिरसे बॉक्सिंग में हाथ आजमाने का और इस प्रकार जेम्स् वॅल्टर ने फिर से बॉक्सिंग के रिंग में कदम रखा । अब लड़ाई सिर्फ जीतने के लिए नहीं थी, अब स्वयं का अस्तित्व बचाना था, अब कुछ बड़ा करना था, स्वयं को सिध्द करना था और इसी ताकद और निश्चय के साथ जेम्स् ने लड़ना शुरू किया, हर मुक्का पहले से ज्यादा ताकदवर था, हर रणनीति पहले से ज्यादा सटीक थी, हर चाल पहले से ज्यादा बुध्दीमानी पूर्ण थी । पूरी ताकद झोंक दी थी, हर फाईट मानों जिंदगी की आखरी फाईट थी और 1935 में चमत्कार हुआ, कुछ दिनों पूर्व बोझ ढोनेवाला मजदूर अमेरीकन बॉक्सिंग जगत का हेवीवेट चॅम्पीयन बना था । जेम्स् वॅल्टर ने इतिहास रचा था । सही माइने में कामयाबी का स्वाद चखा था ।

अब सवाल यह है कि ऐसा क्या है, जो जेम्स् वॅल्टर को उन लाखों लोगों से अलग खड़ा करता है जो जिंदगी से हार मान लेते हैं? जो लड़ने के बजाय भागने में यकिन करते हैं? जो जित के लिए मेहनत करने की बजाय स्वयं की हार को स्वीकार कर लेते हैं? कुछ मुलभूत बातें हैं, जो जेम्स् वॅल्टर को हमसे अलग खड़ा करती है । जेम्स् वॅल्टर में एक जस्बा था, कभी न हार मानने का जस्बा । उनमें जीत की भूख थी, उन्हें आशा थी कि एक दिन उनके सारे सपने साकार होंगे । वे समस्याओं से घिरे थें, पर फिर भी नजर समाधान पर थी । वे संघर्षों से मुकाबला करते हुए थके नहीं, उलटा उनका हर दिन नए उत्साह और जोश के साथ शुरू होता था । उन्हें उनकी खामियाँ पता थी, पर उन्होंने सारी ताकद स्वयं को विकसित करने के लिए झोंक दी । इसीलिए समस्या और संघर्ष उन्हें कभी हरा ना सकें ।

क्या आपको भी स्वयं के व्यक्तित्व का ऐसा निर्माण करना है, जिसमें आप जिंदगी के प्रति विलक्षण उत्सुकता से भरे हो, आपका हरदिन पूरे जोश के साथ शुरू हो, आपके सपनों से आप बेइम्तेहा मुहोब्बत करें, आप हर दिन कुछ नया सीखे, स्वयं के प्रति आत्मसन्मान हो, दूसरों के उपर प्यार हो, आप के पास लड़ने का जस्बा हो, कभी हान न मानने मनोदृष्टि हो? क्या आपको जिंदगी में सही माइने में ऊँचा उठना है? क्या आपको आपके अंदर छिपी ताकद को जगाना है? क्या आपको ‘कभी हार न मानने’ के जस्बे को निर्मित करना है? अगर ‘हाँ’ तो एनएलपी आपके लिए है । यहाँ से अनंत संभावनाओं के व्दार खुलते हैं । यहाँ पर सटीक रणनीति और ठोस कौशल सीखाए जाते हैं । यहाँ पर लड़ने के जस्बे को जगाया जाता है । और यहीं हमारे लिए एनएलपी का मतलब है ।

Sandip Shirsat NLP Master Trainer
Sandip Shirsat

CEO & Founder of Indian Board of Hypnosis & Neuro Linguistic Programming

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