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थिन स्लाइसिंग और एनएलपी पार्ट 5

Thin Slicing Part 5 04

यह आपकी ‘निर्णय प्रक्रिया’ को पूरी तरह से बदल कर रख देगा

 

अब तक हमने ‘थिन स्लाइसिंग’ के बारे में जो चर्चा की उसके कुछ निष्कर्ष के साथ शुरूवात करते हैं ।

  1. ‘थिन स्लाइसिंग’ एक बेहतरीन और ताकदवर दिमागी प्रक्रिया है, जिससे हम पलभर में सटीक निर्णय ले सकते हैं, बशर्ते ‘थिन स्लाइसिंग’ की प्रक्रिया में हम ट्रेन हो ।
  2. बहुत बार ‘थिन स्लाइसिंग’ का आधार हमारे पूर्व अनुभव और ज्ञान होता है । जैसे ही हम हमारे पूर्व अनुभव और ज्ञान को दिमागी तौर पर बदलने में सक्षम हो जाते हैं ‘थिन स्लाइसिंग’ की प्रक्रिया को और बेहतर किया जा सकता है । (यहाँ पर एनएलपी में टाइम लाईन के टुल्स बेहतरीन मदद कर सकते हैं । इसके बारे में अगले ब्लॉग में बात करेंगे ।)
  3. अगर पूर्व अनुभव और ज्ञान गलत या नकारात्मक है, तो ‘थिन स्लाइसिंग’ गलत दिशा में जाती है । ‘थिन स्लाइसिंग’ गलत दिशा में जाती है, तो उसके परिणाम भी गलत होंगे । इसीलिए अगर ‘थिन स्लाइसिंग’ गलत है, तो उसे सही कैसे किया जाएं?

जैसे की पार्ट 3 में हमने फिल्म ‘एक रूका हुआ फैसला’ का उदाहरण देखा था । 12 में से 11 ज्युरी मेंबर्स उनके दिमागी ‘थिन स्लाइसिंग’ प्रक्रिया के आधार पर पलभर में इस निर्णय तक पहुँचे थे, कि लड़का ही कातील है और उसे फांसी होनी चाहिए । यह ‘थिन स्लाइसिंग’ प्रक्रिया जिन बिंदुओं पर हुई थी, वह गलत पूर्व अनुभव और ज्ञान पर आधारित थी । वहाँ पर हमने यह भी देखा था कि सिर्फ 1 ज्युरी ऐसे है जिन्हें लग रहा था कि 11 लोगों ने गलत बिंदूओं पर थिन स्लाइसिंग की है ।

अब सवाल यह उठता है कि अगर आपको लग रहा है कि दूसरों ने ‘थिन स्लाइसिंग’ की प्रक्रिया के तहत गलत बिंदूओं के आधार पर निर्णय लिया है, तो आप उनकी गलत ‘थिन स्लाइसिंग’ की प्रक्रिया को दुरूस्त कैसे करेंगे ? महत्वपूर्ण बात यह है कि वे लोग मान कर चल रहे है कि उनकी ‘थिन स्लाइसिंग’ की प्रक्रिया से लिया निर्णय बिलकूल सही है और उनके अडॅप्टीव्ह अन्कॉन्शस ने ठिक ठिक निर्णय लिया है । अब समस्या यह है कि आपकी ‘थिन स्लाइसिंग’ अलग होने के कारण आपको लग रहा है कि पलभर में दूसरों ने जो निर्णय लिया है, वह गलत है । आम तौर पर इस प्रकार की परिस्थितियां बहुत बार खड़ी होती है ।

अब थोड़ी कल्पना करें कि इसप्रकार की परीस्थिति आपके घर में, ऑफिस में, दोस्तों के साथ खड़ी हुई है, याने आप एक तरफ और दूसरे आपके विरोध में । आपको लग रहा है कि बाकी लोगों ने जो थिन स्लाइसिंग की प्रक्रिया अपनाई है, वह बिलकूल गलत बिंदूओं पर आधारित है तो इस स्थिती में आप क्या करेंगे? आप दूसरों की ‘थिन स्लाइसिंग’ को किस प्रकार से सही रास्ते पर ले जाएंगे? क्या आप उनका ‘फर्स्ट इम्प्रेशन’ या ‘स्नॅप जजमेंट’ जो शायद गलत हो उसे दुरूस्त कैसे करेंगे? और यहीं पर एनएलपी का मेटा मॉडल हमारी मदद करता है ।

अब थोड़ा इस सवाल पर सोचे, जो ज्युरी फांसी के विराध में था उसके दिमाग ने अलग ‘थिन स्लाइसिंग’ क्यों की? क्यों कि उस ज्युरी का दिमाग ‘वह लड़का बेकसूर है ।’ इस प्रकार का फर्स्ट इम्प्रेशन निर्मित कर रहा था? उस ज्युरी के दिमाग ने किन बिंदूओं के आधारपर ‘थिन स्लाइसिंग’ की थी? संक्षेप में यह ज्युरी अलग निर्णय पर किस प्रकार पहुँचा?

जवाब आसान है । उस ज्युरी का दिमाग कुछ अलग देख रहा था, कुछ अलग निरीक्षण उसके दिमाग ने किए थे, उसके दिमाग ने भिन्न प्रकार से ‘थिन स्लाइसिंग’ की थी । वह ज्युरी का दिमाग जिन अलग बिंदूओं पर थिन स्लाइसिंग कर रहा है, उन बिंदूओं पर जरा सोचते हैं । वह कहता है, ‘मैं कोर्ट की कारवाई देख रहा था, सारे सबुत और गवाही सुन रहा था, पर इस मामले में हर एक आदमी इतना निश्चित, इतना शुअर लग रहा था कि उससे मुझे एक अजीब सा अहसास होने लगा कि इतना निश्चित इतना शुअर कोई कैसे हो सकता है ? हो सकता है कि इस शक का कोई मतलब ना हो, पर मुझे एक अहसास होने लगा कि बचाव पक्ष का वकील इतना काबील नहीं था । उसने बहुत सी बातें हाथ से जाने दी । मैं बार बार खुद को इस लड़के की जगह रखकर सोचता था, तब मुझे ऐसा लगा कि इस परिस्थिति में मैं एक दूसरे वकील की मांग करता । लड़के की जिंदगी दांव पर लगी थी, पर लड़के के वकील ने प्रॉसीक्युशन का मुकाबला भी ठीक ढंग से नहीं किया और प्रॉसीक्युशन की पूरी बुनियाद सिर्फ दो गवाहों पर टिकी है और मान लीजिए की अगर वे दो गवाह गलत हो तो ।’

याने इस ज्युरी का दिमाग कुछ ऐसा देख पा रहा था जो दुसरे नहीं देख पा रहे थे । इसीलिए इस ज्युरी ने जो ‘थिन स्लाइसिंग’ की और उससे जो निर्णय आ रहा था वह पूरी तरह से भिन्न था । इसका फर्स्ट इम्प्रेशन पूरी तरह से अलग था । उसका स्नॅप जजमेंट कह रहा था कि  लड़का बेकसुर है ।

अब सवाल यह उठता है कि किसकी ‘थिन स्लाइसिंग’ बराबर है और किसकी गलत? अब हम ठिक ठिक निर्णय पर किस प्रकार से पहुँच सकते है? अब हमें क्या करना होगा, जिससे जो ‘थिन स्लाइसिंग’ गलत हो वह सही बन पाएं? अब इसके लिए हमें प्रश्न पूछने पडेंगे और सटीकता के साथ प्रश्न कैसे पूछे जाए इसमे एनएलपी का मेटा मॉडल हमारी मदद करता है ।

जब भी ‘थिन स्लाइसिंग’ की प्रक्रिया होती है, हमारा दिमाग पलभर में निर्णय लेने के लिए 3 प्रक्रियाओं की मदद लेता है ।

1. डिलीशन: हमारा दिमाग कुछ बातें डिलीट कर देता है ।

2. डिस्ट्रोशन: हमारा दिमाग कुछ बातों को तोड मरोडकर उससे अर्थ निकालता है ।

3. जनरलायझेशन: कुछ बातें हमारा दिमाग जनरलाईज कर देता है ।

और अगर गलत ‘थिन स्लाइसिंग’ हुई है, तो डिलीशन, डिस्ट्रोशन और जनरलायझेशन को ध्यान में रखकर हम प्रश्न पूछ सकते हैं और इस प्रकार से गलत ‘थिन स्लाइसिंग’ को दुरूस्त करने में हमारी मदद हो सकती है ।

जैसे कि, पडोसीयों ने लड़का और उसके बाप में हुए झगडे की आंवाज सुनी थी । पर झगडा किस विषय पर था इसका अंदाजा उन्हें नहीं था। आखिरकार दो थप्पड़ पड़ें, बाप ने लड़के को दो थप्पड़ जड दिए और इसके बाद पडोसीयोंने लड़के को घुस्से से भरा हुआ घर के बाहर जाते देखा ।

पडोसीयोंने इसपर ‘थिन स्लाइसिंग’ की और पलभर में इस निष्कर्ष तक पहूँचे कि दो थप्पड लगाने के बाद लड़के ने बाप का खून किया और घर से निकल गया और इस प्रकार की गवाही भी उन्होंने कोर्ट में दी ।

इसपर ज्युरी, जिसकी ‘थिन स्लाइसिंग’ अलग है वह प्रश्न पूछता है,

“क्या सच में उन्होंने जो सुना और देखा इससे यह साबित होता है कि लड़का ही खुनी है?”

लड़का बचपन से मार खा रहा था, याने उसे मार खाने की आदत थी, तो क्या सिर्फ दो थप्पड पड़ने पर वह बाप का खून कर देगा?

क्या उस लड़के का गरीब होना, नीचले तबके का होना, उसे फांसी के तख्ते तक पहुँचाने के लिए काफी है?

और इसप्रकार से वह 1 ज्युरी 11 ज्युरी मेंबर्स से अलग अलग सवाल पूछता है, जो ‘मेटा मॉडल’ का बेहतरीन उदाहरण है और इससे होता यह है कि 11 ज्युरी मेंबर्स को सवाल पूछते पूछते ‘थिन स्लाइसिंग’ या ‘स्नॅप जजमेंट’ या ‘फर्स्ट इम्प्रेशन’ में जो गलतियाँ थी, वह उजागर होने लगती हैं । उसके सवाल ‘थिन स्लाइसिंग’ की प्रक्रिया में जो डिलीट, डिस्ट्रोट और जनरलाइज हुआ था उसे उजागर करते हैं और अंत में 12 के 12 ज्युरी मेंबर्स इस निर्णय तक पहुँचते हैं कि कोर्ट ने बहुत सारे महत्वपूर्ण बिंदूओं पर गौर नहीं किया है, जो शायद साबित कर सकते थे की लड़का गुनहगार नहीं है ।

‘मेटा मॉडल’ हमें सिखाता है, कि किसप्रकार से अगर दिमाग ने डिलीशन, डिस्ट्रोशन और जनरलायझेशन किया है और गलत ‘थिन स्लाइसिंग’ की है तो कैसे उसे सही किया जाए, इसीलिए एनएलपी अलग है, एनएलपी जादू है । ‘थिन स्लाइसिंग’ के संदर्भ में एनएलपी हमें जो टूल्स् देता है उसमें मेटा मॉडल सबसे अहम् है ।

Sandip Shirsat NLP Master Trainer
Sandip Shirsat

CEO & Founder of Indian Board of Hypnosis & Neuro Linguistic Programming

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