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थिन स्लाइसिंग और एनएलपी पार्ट 3

Thin Slicing Part 3 04

यह आपकी ‘निर्णय प्रक्रिया’ को पूरी तरह से बदल कर रख देगा

हमने पार्ट 1 में थिन स्लाइसिंग की व्याख्या पर चर्चा की थी, उसे थोड़ा दोहराते हैं ।

थिन स्लाइसिंग: ‘थिन स्लाइसिंग’ को आम भाषा में ‘स्नॅप जजमेंट’ या ‘फर्स्ट इम्प्रेशन’ भी कहा जाता है । इसमें हम पलक झपकते ही निर्णय तक पहुँच जाते हैं । हमारे सामने समस्या खड़ी होती है, हमारा दिमाग तुरंत उसपर विचार करता है और पलभर में हम किसी जवाब तक पहुँच जाता है । याने ‘थिन स्लाइसिंग’ में कुछ ही पलों में हमारा दिमाग निर्णय लेता है । इस ‘थिन स्लाइसिंग’ के लिए हमारी जो दिमागी प्रक्रिया होती है, जिससे कुछ ही पलों में हम निर्णय तक पहुँचने में सक्षम होते हैं, इसे हमारा अडॅप्टीव्ह अन्कॉन्शस अंजाम देता है । आज सायकोलॉजी के क्षेत्र में हमारी निर्णय प्रक्रिया को बेहतर करने के लिए हम किस प्रकार से इस अडॅप्टीव्ह अन्कॉन्शस का बेहतर बना सकते हैं इसपर गहन अध्ययन चल रहा है । संक्षेप में हमारा अडॅप्टीव्ह अन्कॉन्शस पलभर में निर्णय ले लेता है, उस प्रक्रिया को हम थिन स्लाइसिंग कहते हैं ।

अब सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पलभर में होनेवाली इस निर्णय प्रक्रिया का कोई आधार तो होगा, जिस आधार पर हमारा अडॅप्टीव्ह अन्कॉन्शस निर्णय ले रहा है । याने हमारा अडॅप्टीव्ह अन्कॉन्शस जिन बिंदूओं का निरीक्षण करते हुए निर्णय ले रहा है, अगर वे बिंदू और उनका निरीक्षण अगर सही है, तो ही पलभर में सटीक निर्णय हो सकता है । जैसे कि शिक्षक अच्छा है या बुरा इस निर्णय पर पहुँचने  के लिए विद्यार्थीयों के अडॅप्टीव्ह अन्कॉन्शस ने जिन बिंदूओं के निरीक्षण किया था, वे बिंदू निर्णय लेने के लिए सबसे बढ़िया थे, इसीलिए सटिक निर्णय हो पाया । अब थोड़ा सोचे, अडॅप्टीव्ह अन्कॉन्शस ने अगर जल्दबाजी में गलत बिंदूओं को निर्णय का अधार बना लिया तो, तो क्या निर्णय गलत नहीं होगा? जरूर होगा । इसपर थोड़ा सोचते हैं ।

जैसे ही 1986 में बनी फिल्म ‘एक रूका हुआ फैसला’ शुरू होती है, हमें कोर्ट रूम दिखाई देता है और साथ साथ एक गुनहगार का चेहरा भी । इस केस की कानूनी कारवाई लगभग खत्म हो चुकी है । पर फिर भी इस गुनहगार की फांसी की सजा को तय करने की आखरी जिम्मेदारी 12 ज्युरीज् के उपर है । फिल्म की शुरूवात में जज साहब 12 ज्युरीज् को एक संदेश देते हुए कहते हैं, “मुजरिम पर कल्त का इल्जाम है, अपने बाप के कत्ल का इल्जाम । कत्ल का जुर्म फौजदारी के मुकदमे में सबसे संगीन माना जाता है । कोर्ट सारे बयानों को सुन चुका है, एक शक्स मर चुका है और दुसरे के जिंदगी का फैसला आपके हाथों में है । अब आप मुकदमे की सारी बारीकियों पर एक साथ बैठकर गौर करेंगे और सच्चाई पर पहुँचने  की कोशिश करेंगे । इस दौरान कोई माकुल शक आप लोगों को नजर आता है और दलीलों की कसौटीपर खरा उतरता है, तो आप बेकसुर का फैसला दे सकते हैं और अगर मुजरिम को कसुरवार ठहराते हैं, तो ऐसी सुरत में रहम कोई सिफारिश मंजूर नहीं की जाएगी और मुजरिम फांसी के तख्ते पर जाएगा । आप लोगों का जो भी फैसला हो वह एकमत से होना जरूरी है । मुझे उम्मीद है कि आप लोग पूरी संजीदगी और इमानदारी से अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे । धन्यवाद!”

और इस प्रकार से 12 ज्युरी मेंबर्स एक हॉल में एकठ्ठा होते हैं, यह तय करने के लिए कि क्या मुजरिम को फांसी दी जाए या नहीं  और सबसे पहले यह तय होता है कि वोटींग होगी, जिन्हे लगता है कि मुजरिम कसुरवार है, वे हाथ उपर उठाएंगे, अगर 12 के 12 ज्युरी मेंबर्स सहमत होते हैं, तो तुरंत मुजरिम को फांसी का फैसला सुनाया जाएगा और इसप्रकार से ‘थिन स्लाइसिंग’ या ‘फर्स्ट इम्प्रेशन’ या ‘स्नॅप जजमेंट’ का एक बढ़िया उदाहरण हमारे सामने पेश होता है । मुजरीम गुनहगार है और उसे फांसी होनी चाहिए, यह माननेवाले ज्युरी मेंबर्स फटाफट हाथ उपर उठाने लगते हैं और 12 में से 11 लोग यह मानकर चलते है कि मुजरीम कसुरवार है । पर सिर्फ एक ही ज्युरी ऐसा है कि जिसे लगता है कि मुजरिम कसुरवार नहीं है और इसप्रकार से फैसला अटक जाता है । आखिरकार एक ज्युरी की राय अलग होने की वजह से बातचीत शुरू करना अनिवार्य हो जाता है और फिर आगे बढ़ती बातचीत के जरीए हमें इन 11 ज्युरी मेंबर्स के दिमाग ने किसप्रकार से गलत बिंदूओं पर ‘थिन स्लाइसिंग’ की है, इसका पता लगना शुरू होता है ।

अब सवाल यह उठता है कि इन 11 ज्युरी मेंबर्स ने किस आधारपर कुछ ही पलों में मुजरीम को फांसी के तख्ते तक पहुँचा दिया? निर्णय तक पहुँचने  के लिए इनके दिमाग ने क्या किया? किस आधारपर पलभर में इन लोगों तय कर लिया कि फांसी होनी चाहिए?

अब थोड़ा इन 11 ज्युरी मेंबर्स के दिमाग में झांकते हैं । नीचे इन 11 ज्युरी मेंबर्स ने फांसी के समर्थन में दिए हुए तर्क है, कि क्यों लड़का गुनहगार है और उसे फांसी होनी चाहिए । इन तर्कों पर थोड़ा सोचे, यहीं वे तर्क हैं, जिनके आधारपर दिमाग ‘थिन स्लाइसिंग’ करते हुए पलभर में इस निर्णय तक पहुँच गया की फांसी होनी ही चाहिए ।

1.    बिलकूल साफ जाहीर है, मैं ने तो जब उसका चेहरा देखा उसी वक्त मुझे समझ में आ चुका था कि वह कातील है ।

थिन स्लाइसिंग का आधार: यहाँ पर दिमाग ‘थिन स्लाइसिंग’ चेहरे के आधारपर कर रहा है, इसका चेहरा भयानक है, इसका मतलब ही यह हुआ कि यह गुनहगार है, भयानक चेहरे को निर्णय का अधार बनाना ‘थिन स्लाइसिंग’ को गलत निर्णय तक पहुँचा रहा है ।

2.    ये लोग ऐसे ही होते हैं, उन्हें जल्द से जल्द फांसी देनी चाहिए, जिससे हमारा समाज स्वच्छ हो जाए ।

थिन स्लाइसिंग का आधार: यहाँ पर दिमाग ‘थिन स्लाइसिंग’ नीचले तबके के बुनियाद पर कर रहा है, जो की एकदम गलत है । याने दिमाग यह मानकर चल रहा है, कि नीचला तबका याने गुनहगार लोग ।

3.    11 ज्युरी मेंबर्स एक बाजू है, इसका मतलब ही यह हुआ कि वह कातील है, बहस की कोई गुंजाइश ही नहीं बनती ।

थिन स्लाइसिंग का आधार: यहाँ पर दिमाग ‘थिन स्लाइसिंग’ मेजॉरिटी या बहुमत को आधार बनाते हुए निर्णय तक पहूँच रहा है । याने जिसके पास बहुमत है वही सही, अल्पमतवाला गलत ।

4.    मुझे लगता है कि लड़का कसुरवार है और यह पांच मिनट में तय हो सकता है और अगर आप सौ साल तक बातचीत करते रहें, तो भी कुछ नहीं बदलनेवाला, मेरा दिमाग आप नहीं बदल सकते ।

थिन स्लाइसिंग का आधार: अति आत्मविश्वास या मैं जो मानता हूँ वही सही है, इस आधारपर क्या दिमाग सही निर्णय तक पहूँच पाएगा?

5.    लड़के का भूतकाल: लड़का गरीब परिवार से है, उसकी परवरिश शहर के सबसे गंदे इलाके में हुई है, जब वह नौ साल का था, तब उसकी मां उसे छोड़कर चली गयी, पिता जब चोरी के इल्जाम में जेल में थे, तब यह बच्चा यतिम खाने में दिन काट रहा था ।

लड़के का भूतकाल जानने के बाद एक ज्युरी कहता है, मैं इन लोगों को अच्छी तरह से जानता हूँ, इन लोगों की पूरी की पूरी कौम ही खराब है । इनके किसी बात पर यकीन कर लेना सरासर बेवकूफी है । इस प्रकार के लोग पैदाइशी झुठे होते हैं ।

थिन स्लाइसिंग का आधार: गरीबी, बाप चोर, गंदा इलाका इ. काफी है उसे फांसी देने के लिए । याने अगर कोई किसी अलग कौम से है, नीचले तबके से है, तो उसकी पृष्टभूमी काफी है, उसको गुनहगार साबित करने के लिए । अगर दिमाग इस आधारपर ‘थिन स्लाइसिंग’ करेंगा, तो निर्णय गलत होना लाजमी है ।

6.    मुझे लगता है, लड़का दोषी है क्योंकि इसके विपरीत किसी ने कुछ साबित नहीं किया । मुझे पता नहीं पर मुझे लगता है कि लड़का दोषी है । मुझे यह महसूस हो रहा है ।

थिन स्लाइसिंग का आधार: वह बेकसूर है इसका कोई प्रमाण नहीं है तो इसका मतलब ही यह हुआ की वह गुनहगार है । अगर दिमाग इस तरीके से स्नॅप जजमेंट ले तो निर्णय घातक ही साबित होगा ।

इसका तात्पर्य यह हुआ कि ‘थिन स्लाइसिंग’ एक ताकदवर और जादूई प्रक्रिया है, पर अडॅप्टीव्ह अन्कॉन्शस ने अगर जल्दबाजी में गलत बिंदूओं को निर्णय का अधार बना लिया, तो निर्णय गलत होना लाजमी है । तो क्या इससे बचा जा सकता है? हाँ जरूर, पर इसमे एक समस्या है, ‘थिन स्लाइसिंग’ प्रक्रिया कुछ ही पलों में हो जाती है और वह भी हमारे अडॅप्टीव्ह अन्कॉन्शस के व्दारा । याने हमारी समझ में कुछ आए इसके पूर्व ही अडॅप्टीव्ह अन्कॉन्शस निर्णय ले लेता है ।

तो आखिरकार अब सवाल यह उठता है कि क्या इस अडॅप्टीव्ह अन्कॉन्शस को ट्रेन किया जा सकता है, जिससे निर्णय गलत होने की संभावना को कम से कम किया जा सके? क्या इस अडॅप्टीव्ह अन्कॉन्शस की ‘थिन स्लाइसिंग’ प्रक्रिया को नियंत्रित कर दिशा दी जा सकती है?

अगले ब्लॉग में इन सवालों के जवाब ढुंढते हैं । तब तक के लए ‘एन्जॉय युवर लाईफ अॅन्ड लिव्ह विथ पॅशन ।’

Sandip Shirsat NLP Master Trainer
Sandip Shirsat

CEO & Founder of Indian Board of Hypnosis & Neuro Linguistic Programming

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