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NLP Certification in India

एनएलपी सर्टिफिकेशन - कहानी के पीछे की कहानी

Story behind NLP Certification 06

जब मैंने ‘एनएलपी सर्टिफिकेशन’ गुगल किया, तो करीब 80 सेकंद में 5,00,000 से ज्यादा सिझल्टस् सामने आए । साथ ही साथ 5 से 7 गुगल अॅडस् भी दिखी । एनएलपी की अलग अलग वेबसाईटस् खुलने लगी । एनएलपी पढ़ानेवालों का मानों ताता लग गया था । अब आगे में जो बतानेवाला हूँ, इससे आपको जरूर हैरानी होगी, इस वक्त इस दुनिया में 1000 से ज्यादा एनएलपी इंस्टीटयूटस् है, एनएलपी पर तकरीबन 1200 से ज्यादा किताबें लिखी गई है, 50 से ज्यादा लोग ऐसे हैं, कि जिन्होंने असल में एनएलपी के विकास में सहयोग दिया है । ये सारे लोग अपने अपने नाम से एनएलपी वर्कशॉपस् चला रहे हैं । हैरान करनेवाली बात यह है, कि हर किसी का अलग सर्टिफिकेशन, अलग सिलॅबस, अलग डयूरेशन और अलग फिस है । इस पर कुछ सवाल खड़े होते हैं, शायद आपके भी मन में ये सवाल आए हो, जैसे कि क्या एनएलपी को रेग्युलेट करनेवाली कोई संस्था नहीं है? क्या एनएलपी सीखानेवाली कोई ओरीजनल संस्था नहीं है? एक एनएलपी सर्टिफिकेशनस् से दूसरा कैसे भिन्न है? पर इन सवालों के जवाब ढुंढने से पूर्व हमें एनएलपी सर्टिफिकेशन के कहानी के पीछे की कहानी जानना जरूरी है ।

1970 में रिचर्ड बॅन्डलर और जॉन ग्राइंडर ने एनएलपी की रचना की । शुरुवाती दौर में एनएलपी सायकोथेरपी के संदर्भ में इस्तेमाल होती थी और सीखनेवाले ज्यादातर साइकोलॉजी के क्षेत्र से थें । पर धीरे धीरे एनएलपी का विस्तार होने लगा, अलग अलग क्षेत्रो में एनएलपी की उपयोगिता साबीत होने लगी, लोग जुड़ते गए, एनएलपी को विकसित करने में मदद करने लगें, कारवां बनता गया और कहानी आगे बढ़ने लगी ।

अब साल था 1981 ! बॅन्डलर और ग्राइंडर में अनबन हुई और दोनों के रास्ते अलग हुए । यह एनएलपी कम्युनिटी में पहली फुट थी । सही माइने में कम्युनिटी बनने से पूर्व ही कम्युनिटी बिखर गई थी । जॉन ग्राइंडर ने खुद के एनएलपी सर्टिफिकेशन कोर्सेस् शुरू किए थें, जिनमें बॅन्डलर को कोई हिस्सा नहीं दिया गया । इसपर नाराज होकर बॅन्डलर ने ग्राइंडर के खिलाफ मुकदमा दायर किया । मुकदमा चला और अंतिम निर्णय बॅन्डलर के पक्ष में आया । अंत में दोनों में एक समझौता हुआ, जिसकें तहत ग्राइंडर को एनएलपी सेमिनार लेने का दस साल का लायसेंस दिया गया । साथ में यह भी तय हुआ की हर सेमिनार के बाद बॅन्डलर को रॉयल्टी दी जाएगी । उस वक्त ऐसा लगा कि शायद सब कुछ ठीक हो गया है और आपको भी लगा होगा की कहानी खत्म हुई, पर नहीं कहानी और आगे बढ़ी ।

1996 में फिर से एक मुकदमा दायर हुआ । बॅन्डलर ने ग्राइंडर और एनएलपी से जुड़े लगभग सारे बड़े नामों के खिलाफ कोर्ट केस किया । ऐसा कहा जाता है कि लगभग 200 से ज्यादा लोगों के खिलाफ बॅन्डलर ने मुकदमा दायर किया था । बॅन्डलर का कहना था कि ये सारे एनएलपी ट्रेनर्स एनएलपी के नाम से पैसा बना रहे हैं, पर मुझे रॉयल्टी के नाम पर कुछ नहीं मिल रहा है और अगर एनएलपी की संरचना मैंने की है, तो मुझे रॉयल्टी मिलनी चाहिए । शायद आप यह जानकर चौक जायेंगे कि जो मुकदमा हुआ और जो रॉयल्टी की रकम मांगी गई वह 10,000,000 डॉलर थी । कोर्ट का निर्णय आया । कोर्ट ने कहा कि बॅन्डलर ने एनएलपी लायसेंन्स का गलत अर्थ लगाया है । जिस रॉयल्टी की वे मांग कर रहे हैं, उसकें वे हकदार नहीं हैं और फैसला बॅन्डलर के खिलाफ गया । अब कहानी एक कदम और आगे बढ़ी ।

साल 2000 में बॅन्डलर और ग्राइंडर के बीच और एक समझौता हुआ, जिसकें तहत दोनों को एनएलपी का को-फाउंडर और को-क्रिएटर बताने पर सहमती बनी और साथ ही साथ यह भी तय हुआ कि दोनों एक दूसरे के प्रयासों को कमतर नहीं मानेंगे । अब यहाँ से कहानी अंतिम पडाव पर पहुँच चुकी थी ।

अंत में यह भी तय हुआ कि एनएलपी किसी एक की मालकीयत नहीं होगी और एनएलपी सीखाने पर और लोगों को एनएलपी सर्टिफाय कराने पर कोई पाबंदी नहीं होगी और इसप्रकार से एनएलपी से ट्रेडमार्क हट गया और एनएलपी अलग अलग लोगों की मालकियत से मुक्त हो गया । ऐसा लगी कि अब जाकर कहानी खत्म हुई । ऐसा होता तो अच्छा होता, पर अब यहाँ से एक नई कहानी शुरू हुई ।

एनएलपी से ट्रेडमार्क हटने के बाद अलग अलग लोग एनएलपी को विकसित करने लगें, एनएलपी में नए मॉडल्स जोडे जाने लगें, अलग अलग सर्टिफिकेशन्स् निर्मित होने लगें । इससे एक अच्छी बात यह हुई कि एनएलपी का विकास होने लगा, अलग अलग अच्छी चीजें जुड़ गई, जो गलत था वह पीछे छुटने लगा । अलग अलग इंस्टीट्युटस् बनें, एनएलपी बोर्ड निर्मित हुए और दुनियाभर में एनएलपी का प्रसार होने लगा । एनएलपी की मदद से लोगों की जिंदगियाँ बदलने लगी, जो आदतें बदलने में जिंदगी निकल जाती थी, वह कुछ ही पलों में बदलने लगी, जिंदगी बेहतर होने लगी । तो क्या यहाँ पर कहानी खत्म हुई? ‘नहीं’ इस एनएलपी सर्टिफिकेशन की कहानी ने और एक मोड लिया ।

दुनिया को स्वपरीवर्तन के लिए एनएलपी के रूप में एक बेहतरीन रास्ता मिला, पर इससे एक गड़बड़ हुई, ढेर सारी एनएलपी इन्स्टीट्युटस्, एनएलपी कोर्सेस्, अलग अलग सिलॅबस्, ट्रेनरस् की फौज बनने लगी । सर्टिफिकेटस् बाटे जाने लगें । एनएलपी स्पिरीट खत्म होने लगा । एनएलपी के नाम कुछ और ही सिखाया जाने लगा और इसीलिए अगर आप को एनएलपी में स्वयं को ट्रेन करना है, तो बेहतरीन एनएलपी ट्रेनिंग ढुंढना यह आपकी जिम्मेवारी है, पर यहाँ पर मैं आपकी थोड़ीसी मदद कर सकता हूँ, जिससे एनएलपी सर्टिफिकेशन की कहानी उसकें अंत तक पहूँचे । तो एनएलपी सर्टिफिकेशन करने से पूर्व नीचे लिखी हुई कुछ बेहद महत्वपूर्ण बातों पर ध्यान देना जरूरी है ।

1. आपको एनएलपी क्यों सीखना है?

इस सवाल पर गौर करें । आपको सही में सीखना है, या सिर्फ आपके नाम के आगे एनएलपी प्रॅक्टिशनर लिखना है । अगर सिर्फ सर्टिफिकेट चाहिए, तो ऑनलाइन मिल जाएगा वह भी सिर्फ 1000 रूपये में । पर अगर आपको सही में सीखना है, स्वयं को और दूसरों को जीवन परिवर्तन में मदद करनी है, जीवन के हर क्षेत्र में कामयाबी के बुलंदियों को छुना है, तो एक ऐसी ट्रेनिंग करें, जहाँ पर सही माइने में एनएलपी सिखाया जाता हो और उनका सर्टिफिकेट भी सन्मानित हो ।

2. क्या एनएलपी बोर्ड बेहतर है एनएलपी इन्स्टीट्युट से?

अगर आप किसी एनएलपी बोर्ड से दिया जानेवाले ट्रेनिंग करें, तो अच्छा होगा क्योंकि ढेर सारी एनएलपी इन्स्टीट्युट किसी बोर्ड के साथ टाय अप होती है, जो ट्रेनिंग के बाद आपको बोर्ड से लेकर सर्टिफिकेट देती है । इससे अच्छा आप सीधे एनएलपी बोर्ड से ट्रेनिंग करें, जिससे एनएलपी ट्रेनिंग की क्वॉलिटी बरकरार रहे और आगे चलकर आप उस एनएलपी बोर्ड के ट्रेनर भी बन सकें ।  

3. एक ऐसा एनएलपी बोर्ड ढुंढे जो आपको सीखाने में उत्सुक है, ना की सिर्फ सर्टिफिकेशन बेचने में ।

कोर्स करने से पूर्व एनएलपी सर्टिफिकेशन कोर्स से जुड़ी सारी बेबसाईटस् ध्यान से चेक करें । वेबसाईट पर पढ़ने योग्य, एनएलपी सीखने योग्य कितनी चीजें हैं और बेचने के लिए उपयुक्त कितनी है, इसपर थोड़ा ध्यान दें । ढेर सारी वेबसाईट सिर्फ बेचने के लिए बनी होती है, इनसे थोड़ी दूरी बनाना बेहतर होगा ।

4. एनएलपी सिलॅबस् पर गौर करें ।

क्या कुछ नया सिखाया जा रहा है, क्या कुछ विशेष सिखाया जा रहा है, क्या कुछ बेहतर सिखाया जा रहा है उसे थोड़ा ढुंढे, क्योंकि एनएलपी के क्षेत्र बहुत सारी नई चीजें हो रही है । दिन ब दिन साइकोलॉजी का विस्तार और विकास हो रहा है । तो क्या इन नई बातों को आप सिलॅबस में ढुंढ पा रहे है?

5. क्या वह एनएलपी इन्स्टीट्युट या एनएलपी बोर्ड रिसर्च में लिप्त है?

अगर ‘हाँ’ तो आपको बेहतर ट्रेनिंग मिलने की उम्मीत बढ़ जाएगी । बहुत बार कोई सीख कर आता है और सीखाना शुरू करता है, बिना उस पर गहन अध्ययन किए, इसीलिए रिसर्च में समाहीत हो, ऐसी जगह से ट्रेनिंग लेना बेहतर होगा ।

6. क्या ट्रेनिंग के बाद एनएलपी कौशल विकसित करने के लिए मदद मिल रही है?

बहुत बार मदद के नाम पर कुछ पन्ने थमाए जाते हैं । याद रखना: एनएलपी एक कौशल है, इसे सीखने में थोड़ा समय लगता है और अगर लगातार एनएलपी बोर्ड से मदद मिलती रहे, तो सीखना आसान हो जाता है, नहीं तो बहुत बड़ी संभावना यह है कि आपके पास तो सर्टिफिकेट होगा, पर एनएलपी में महारत नहीं होगी ।

इसीलिए इन छह बातों का ध्यान रखें और एनएलपी सीखकर स्वयं के और दूसरों के जीवन को रूपांतरीत करें । तो क्या कहानी का अंत हुआ? हरगीज नहीं! अभी तो एक नई कहानी शुरू होगी, जब आप एनएलपी सीखना शुरू करेंगे और जीवन में सफलता की बुलंदियों को छुएंगे ।

Sandip Shirsat NLP Master Trainer
Sandip Shirsat

CEO & Founder of Indian Board of Hypnosis & Neuro Linguistic Programming

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