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NLP Coaching Certification in India

माइंडफुलनेस प्रस्तावना

Research on Mindfulness 03

ब्लॉग की यह कडी दुसरे विषयों से थोड़ी अलग है । अब तक अलग अलग विषयों पर मैं ही लिखता था, पर इस कडी में हम कुछ दुसरे मास्टर्स के आर्टीकल्स पढेंगे । वैसे तो मांइफुलनेस, अवेरनेस, मेडिटेशन, कॉन्शसनेस, ध्यान, साक्षीभाव इ. सारे शब्द किसी एक ही बात की ओर इशारा करते हैं । और शायद आपको पता होगा, कि 'माइंडफुलनेस' चेंज वर्क में बड़ी ही बुनियादी बात है । इस कडी के सारे ब्लॉग इसी विषय के आसपास होंगे और इसमें हम कुछ बड़ी हस्तियों के विचारों पर सोचने का प्रयास करेंगे, जैसे कि ओशो, जे. कृष्णमूर्ती, जॉर्ज गुरर्जीएफ, एकहार्ट टोले, दिपक चोप्रा इ. । इसीलिए ब्लॉग की इस कडी को मैंने ‘मास्टर्स ऑन माइंडफुलनेस’ का नाम दिया है । और मुझे यकिन है कि इस विषय के संदर्भ में पढ़ना आपके लिए भी बेहतरीन अनुभव साबित होगा । आगे बढ़ने से पूर्व ‘माइंडफलनेस’ के संदर्भ में ओशो की कुछ पंक्तियाँ पढ़ते हैं ।

What Is Mindfulness?

When the mind disappears, thoughts disappear. It is not that you become mindless; on the contrary you become mindful. Buddha uses these words “right mindfulness” millions of times. When the mind disappears and thoughts disappear you become mindful. You do things – you move, you work, you eat, you sleep, but you are always mindful. The mind is not there, but mindfulness is there. What is mindfulness? It is awareness. It is perfect awareness.

Osho, And the Flowers Showered, Talk #11

 

अब थोड़ा आगे बढ़ते है और एक कहानी से शुरूवात करते है ।

एक आदमी ने शराब पी ली थी और वह रात बेहोश हो गया । आदत के वश अपने घर चला आया, पैर चले आए घर, लेकिन बेहोश था तो घर पहचान नहीं सका । सीढ़ियों पर खड़े होकर पास पड़ोस के लोगों से पूछने लगा, कि मैं अपना घर भूल गया हूँ, कोई कृपा कर मुझे मेरे घर पहूँचा दो । शोरगुल सुन कर उसकी बूढी मां उठ आई, दरवाजा खोल कर उसने देखा, उसका बेटा चिल्ला रहा है, रो रहा है, कि मुझे मेरे घर पहूँचा दो । उसने बेटे के सिर पर हाथ रखा और कहा, “बेटा यह तेरा ही घर है और मैं तेरी मां हूँ ।”

शराब के नशे में धूत लड़के ने कहा, “हे बुढिया, तेरे ही जैसी मेरी बूढी मां है, वह मेरा इंतजार करती होगी । आप सब लोग मुझपर कृपा करो और मुझे मेरे घरका रास्ता बता दो ।” इसपर सब लोग खिलखिलाकर हंस रहे थे, उनको हंसता देख उस शराबी ने पूछा, “पर आप सब लोग क्यों हंस रहे हैं? कोई मुझे मेरे घर का रास्ता क्यों नहीं बताता? मैं कहाँ जाउ? मैं कैसे अपने घर का रास्ता ढूंढू?” वह चिल्लाने लगा । उसी वक्त रास्ते से एक बैलगाडी आ रही थी, उसने उस बैलगाडी को रोका और उसमें बैठ गया । लोग बोलने लगे, “अरे पागल, तू घर के द्वार पर ही खड़ा है, अगर तू बैलगाडी से कही जाएगा, तो घर के करीब नहीं उल्टा दूर जाएगा । पर उसने किसी कि बात न मानी और उसके घर को ढुंढने के लिए वह घर से दूर निकल पडा ।

शायद हम भी ऐसे ही हैं, स्वयं से दूर चले आए हैं, अब फिर से स्वयं के नजदीक आने पर विचार करना होगा । इसी सोच के साथ शायद भूतकाल में 'माइंडफुलनेस’ या 'अवेरनेस’ या 'जागरूकता’ की विधियाँ खोजी गयी । हमें स्वयं के नजदीक आना है, पर शायद हम जो कुछ कर रहे हैं, उससे हम स्वयं से दूर जा रहे हैं । स्वयं के नजदीक आने के लिए माइंडफुलनेस की विधियाँ मदद कर सकती हैं और माइंडफुलनेस पर जो संशोधन हो रहे हैं, वे सारे संशोधन इसी के तरफ इशारा करते हैं । जैसे ही हम माइंडफुलनेस का अभ्यास करने लगते हैं, हमारे अंदर की अच्छाई, सकारात्मकता, उत्साह और आंनद जागृत होने लगता है । नयी खोजे तो इस तरफ इशारा करती है, कि जीवन रूपांतरण हेतू सिर्फ माइंफूलनेस ही काफी है । जैसी ही हम हमारी भावनाओं के प्रति, विचारों के प्रति और वर्तन के प्रति सजग होने लगते है, वैसे ही नकारात्मकता, खालीपन और दुख तिरोहीत होने लगते हैं ।

एक सबसे अहम बात यहाँ पर याद रखनी होगी, जीवन में किसी भी बदलाहट की शुरूवात माइंडफुलनेस या जागरूकता से ही होती है । इसीलिए किसी भी चेंजवर्क को शुरू करने से पूर्व मैं क्लायंट को माइंडफुलनेस या जागरूकता से जुडी हूई कुछ अॅक्टिव्हीटीज् देता हूँ । जिससे चेंजवर्क आसान हो जाता है । जैसे ही क्लायंट उसकी समस्या के संदर्भ में सचेत होने लगता है, वैसे ही एनएलपी के टूल्स् का इस्तेमाल करना आसान हो जाता है । कभी कभी तो ऐसा भी होता है, कि सिर्फ माइंडफुलनेस या जागरूकता के आने से ही समस्याएँ तिरोहीत हो जाती हैं । शायद यहीं वह कारण है, जिसके चलते माइंडफुलनेस मेडिटेशन सिर्फ मेडिटेशन की विधी न रहकर 'माइंडफुलनेस थेरपी’ बन रहा है ।

अब आगे माइंडफुलनेस या जागरूकता पर बात करने से पूर्व हाल में हुए कुछ संशोधनों के उपर नजर डालते हैं ।

8 हफ़्तों के माइंडफुलनेस ट्रेनिंग के बाद लगभग 80 प्रतिशत प्रतिभागियों कि अँगझायटी लेवल में 60 प्रतिशत की कमी देखी गयी ।

 माइंडफुलनेस वर्कशॉप के बाद किए गए सर्वे में एक चौकानेवाली बात सामने आयी । माइंडफुलनेस से लोगों में जो दूसरों के वंश या जाती के प्रति पूर्वाग्रह होते हैं, उसकी तीव्रता में भी बड़ी भारी गिरावट देखी गयी । लोग ज्यादा शांत, संयमित और दयालू प्रतीत हुए ।

एक शोध में यह भी देखा गया, कि जो लोग अवसाद या डिप्रेशन से ग्रस्त हैं, उनमें भी माइंडफुलनेस ट्रेनिंग के बाद सुधार देखा गया ।

आज बहुत बड़ी संख्या में लोगों को किसी काम पर फोकस करने में दिक्कते आ रही है । हमारी फोकस करने की क्षमता टूट रही है । आज दो पन्ने मन लगाकर पढ़ना भी बड़ी बात हो चुकी है । पर हाल ही में हुए शोध कहते हैं, कि हमारे फोकस करने की क्षमता को माइंडफुलनेस का अभ्यास तीव्रता से बढ़ा सकता है ।

पर यह माइंडफुलनेस क्या है? यह कैसे काम करता है? इसका अभ्यास किस प्रकार से किया जाए? इन प्रश्नों के उत्तरों को जानने के लिए आपको 'मास्टर्स् ऑन माइंडफुलनेस’ के ब्लॉग पढ़ने होंगे और मुझे यकिन है, कि यह ब्लॉग आपकी सोच को बदलकर रख देंगे, जीवन में छिपी नई संभावनाओं को उजागर करेंगे और आपको और ज्यादा शांत, उत्साही, संयमित और दयालू बनाने में आपकी मदद करेंगे ।

Sandip Shirsat NLP Master Trainer
Sandip Shirsat

CEO & Founder of Indian Board of Hypnosis & Neuro Linguistic Programming

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