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क्या ‘फायरवॉकिंग’ से जीवन रूपांतरण होगा?

NLP Training Firewalking 05

‘फायरवॉकिंग’, क्या आपने यह शब्द इससे पहले सुना है? जरा दिमाग पर जोर डाले? अगर आप को एनएलपी के बारे में थोड़ा बहुत पता है, अगर आपको टोनी रॉबिन्स् के बारे में पता है, तो आपने फायरवॉकिंग के बारे में जरूर सुना होगा ।

अब जरा कल्पना करें, कि आपके सामने आठ से दस फिट तक जलते हुए कोयले डाले हैं, जिनकी गरमाहट दूर खड़े रहते हुए भी आप महसूस कर सकते हैं, वह जलता हुआ लाल तप्त कोयला देखना भी डर का एहसास खड़ा कर रहा है और उस आग को देखते हुए, आप मन ही मन में सवाल कर रहे हैं, कि क्या में सच में यह दस फिट का अंतर जलते हुए कोयले के उपर से चलते हुए पार कर सकुंगा । अगर कुछ गड़बड़ हुई तो? आपको यह असंभव लगने लगता है, आप के मन में संशय है, धीरे धीरे संशय डर में तब्दील होने लगता है ।

पर फिर आपको तैयार किया जाता है, आपको आपकी जिंदगी के सबसे ताकदवर मनस्थिति में लाया जाता है, आपको कैसे चलना है इसकी सूचनाएँ दी जाती हैं, आपको कहा जाता है कि आपके मन में चल रहे संवाद को बंद करें और आप एक ऐसी भावदशा में आए जहाँ पर आप पूरी तरह से आत्मविश्वास से भरे हो और आपको पूरा यकीन हो, कि आप यह कर सकते हैं और फिर उस जलते कोयले के सामने आप खड़े होते हैं, पूरी तैयारी के साथ और फिर सेंकडों लोग चिल्लाने लगते हैं, आपका हौसला बढ़ाने लगते हैं, उस कोलाहल के बीच सोचना लगभग असंभव हो जाता है । आप में ताकद का संचार होने लगता है । लोगों के उस शोर, आपका हौसला बढ़ाने से आपका आत्मविश्वास दोगुना हो जाता है और पूरे जोश के साथ आप आराम से उस जलते हुए लाल गरम कोयले के उपर पैर रखते हुए चलकर उस दस फिट के अंतर को पार करते हैं ।

ऐसा ही कुछ नजारा होता हैं जापान के आकीबासन मंदिर के बाहर! जहाँ पर हर साल दिसंबर महिने के दूसरे रविवार को ‘फायरवॉकिंग’ के जरिए धार्मिक अनुष्ठान किया जाता है । सबसे पहले पूजारी जलते हुए कोयलों की पूजा करता है और फिर इसकें बाद ‘फायरवॉकिंग’ की शुरूवात होती है, जिसकें साथ जोरों से मंत्र उच्चारण चलता है । भगवान का नाम लिया जाता है, लोग जोरों से प्रार्थना करते हैं और सेंकडों लोग आग पर चलने का कारनामा आराम से करते हैं । यह प्रथा सालों से चल रही है । उनका मानना है हैं इससे उनकी जिंदगी खुशहाल होती हैं, आनंद की वर्षा होती है, दुखों का नाश होता है । इसका मतलब ही यह हुआ कि ‘फायरवॉकिंग’ एक बहुत पुराना कर्तब है, जो हजारों सालों से अलग अलग देशों में धार्मीक विधी के नाम पर किया जाता है ।

पर अब कुछ सवाल खड़े होते है, जैसे की ‘एनएलपी’ और ‘फायरवॉकिंग’ का क्या संबंध है? क्या ‘फायरवॉकिंग’ एनएलपी का हिस्सा है? क्यों कुछ ट्रेनर्स ‘फायरवॉकिंग’ सीखाते हैं? तीसरे सवाल का जावाब जानने से पूर्व पहले दो सवालों के जवाब दे देता हूँ । ‘एनएलपी’ और ‘फायरवॉकिंग’ में कुछ भी संबंध नहीं है । ‘फायरवॉकिंग’, ‘एनएलपी’ का बिलकूल भी हिस्सा नहीं है । अब तीसरे सवाल की तरफ मुडते हैं, तो क्यों कुछ ट्रेनर्स ‘फायरवॉकिंग’ सीखाते हैं? इस सवाल का जवाब ढुंढने से पूर्व ‘फायरवॉकिंग’ सीखाना कहाँ से शुरू हुआ उसे खंगालते हैं ।

हुआ यह कि 1980 में अॅन्थनी रॉबिन्स, जॉन ग्राइंडर के संपर्क में आए जो कि एनएलपी को-फाउंडर थें । जल्द ही दोनों पार्टनर बन गए और साथ में एनएलपी सेमिनारस् लेने लगें ।  1983 में अॅन्थनी रॉबिन्स ने ‘फायरवॉकिंग’ सिखी और उनके सेमिनारस् में उसका प्रयोग करने लगें । इससे हुआ यह कि  ‘फायरवॉकिंग’ कुछ ही दिनों में उनके सेमिनार की मार्केटिंग का एक बेहतरीन साधन बन गया । उन्होंने ‘फायरवॉकिंग’ के प्रयोग को बड़े जोरो शोरो से उछाला और कुछ ही दिनों में ‘फायरवॉकिंग’ अॅन्थनी रॉबिन्स के सेमिनार का प्रतीक बन गया और इस प्रकार से एनएलपी और ‘फायरवॉकिंग’ का संबंध जुड़ने लगा । मार्केटिंग की यह कल्पना इतनी बढ़ीया थी कि पूरी दुनिया में ट्रेनर्स ने इसकें अलग अलग संस्करण निर्मित किए । जैसे कि, कांच के टुकड़ों पर चलना, जलता हुआ कॉटन खाना, जलते हुए रींग से छलांग लगाना, हांथों की चमडी में सुई डालना इ. और जैसे जैसे इस प्रकार के प्रयोग ज्यादा संख्या में होने लगें वैसे उनके पीछे का मूल संदेश लुप्त होने लगा और धीरे धीरे इस प्रकार के प्रयोग हँसी मजाक केंद्र बनने लगें । कुछ ट्रेनर्स की सोच थी कि उनके ट्रेनिंग में कुछ तो अलग करना है और इसी सोच के कारण अलग अलग प्रयोग होने लगें, जिनका एनएलपी से कोई ताल्लूख नहीं था । यह तो सिर्फ छोटे मोटे जादू के प्रयोग हैं, जिसे आप कहीं पर भी सीख सखते हैं, पर मूल सवाल यह है कि क्या इससे जीवन रूपांतरण होगा?

शायद अॅन्थनी रॉबिन्स की सोच अलग थी । ‘फायरवॉकिंग’ के प्रयोग से रॉबिन्स यह सीखाना चाहते थें कि  अगर आप चाहे, तो जिंदगी में भय को नियंत्रित कर सकते हैं, परिस्थितियां विपरीत होने के बावजूद भी आप अॅक्शन ले सकते हैं, आपकी ताकद आपके अंदर है, आप स्वयं के मालिक है । इस संदेश के साथ साथ ‘फायरवॉकिंग’ की और एक उपयोगिता थी । ‘फायरवॉकिंग’ एक ऐसा प्रयोग था, जिससे एनएलपी के कुछ टॉपिक्स, जैसे स्टेट मॅनेजमेंट, अॅन्करींग, रिसोर्सफुलनेस इ. को बड़ी आसानी से सिखाया जा सकता था । पर अगर ‘फायरवॉकिंग’ के बाद भी जिंदगी में आपके जो सपने हैं, उन्हें पूरा करने की अगर आप हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं, तो ‘फायरवॉकिंग’ महज एक प्रयोग बन कर रह जाता है । असल बात तो समझ में ही नहीं आती । इससे तो अच्छा यह होता की आप दस दिनों तक लगातर सबमोडॅलिटीज का अभ्यास करते और सबमोडॅलिटीज में महारत हासील करतें । (सबमोडॅलिटीज एनएलपी में एक ताकदवर विधी है, जिसमें हम स्वयं के दिमाग में आनेवाले इमेजेस को, साउंडस् को और फिलिंग को नियंत्रित करना और बदलना सीखते हैं ।) और यहीं वह मूल बात है, जिससे हम स्वयं के डर को नियंत्रित कर सकते हैं । सबमोडॅलिटीज के अभ्यास से, ‘जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए हमारे अंदर छिपे डर को काबू करना जरूरी होता है ।’ इस तकनीक में हम माहिर बनते और डर पर काबू करना हमारे लिए एक खेल बन जाता । पर दुर्भाग्य से ‘फायरवॉकिंग’ का खेल इतना बड़ा हो जाता है कि प्रतिभागी यह भूल जाते हैं कि सिर्फ और सिर्फ सबमोडॅलिटीज के अभ्यास से ही डर को, स्वयं के दिमाग को नियंत्रित किया जा सकता है और ‘फायरवॉकिंग’ उसका महज एक प्रतीकभर है और जैसे ही प्रतीको में अटक जाते हैं, जीवन की प्रगति रूक जाती है ।

इसीलिए याद रखना: एनएलपी एक कौशल है, जिसका अभ्यास आप को हर रोज करना पड़ेगा, लगातार अभ्यास करने से ही महारत हासील होगी । अगर आपको लगता है कि कोई मसीहा, कोई गुरू, कोई मास्टर, आपकी जिंदगी में आएगा और एक दिन अचानक आपकी जिदंगी बदलकर रख देगा, तो आप गलती कर रहे हैं । शायद यहीं हमारी सुप्त इच्छा, तुरंत जीवन परिवर्तन हो जाए, कोई और हमारे जीवन को परिवर्तित करने का काम कर दे, हमें विकसित होने के लिए तकलीफों से गुजरना ना पड़ें, सब कुछ आराम से और मुफ्त में हो जाए, हमारी यह मानसिकता हमें गैरजरूरी चीजों में अटका देती है, परिवर्तन तो नहीं होता, पर हमें ठगने का दूसरों को मौका मिलता है और अंत में हाथ कुछ भी नहीं लगता ।

आप ही जरा सोचे, कांच के टुकड़ों पर चलना, जलता हुआ कॉटन खाना, जलते हुए रिंग से छलांग लगाना, हांथों की चमडी में सुई डालना इ. से क्या हासील होगा ? याद रखना ज्यादातर बार ‘फायरवॉकिंग’ जैसी अॅक्टिव्हीटीज सिर्फ और सिर्फ मार्केटिंग के टूल के तौर पर इस्तेमाल की जाती है, इसीलिए एनएलपी का कोर्स करने से पूर्व इस बात की थोड़ी चिंता करें, क्या सही में एनएलपी सिखाया जाएगा या एनएलपी के नाम पर अलग अलग अॅक्टिव्हीटीज् के जरिए आपका मनोरंजन करके आपको सर्टिफिकेट देकर घर भेज दिया जाएगा ।

एक बात और, क्या आपको नहीं लगता कि हम में से कितने ही लोग ऐसे हैं, जो हररोज कांच के टुकड़ों पर या जलते हुए कोयलों पर चलकर स्वयं का जीवन छलनी कर रहे हैं, चाहे वह जीवन की निराशा हो, दुख हो, दर्द हो, या जीवन की तकलीफे हो । क्या जिंदगी के दुखों की जलन कम थी, जो जलते हुए कोयले के उपर चलने चल पड़े? संक्षेप में अगर आप प्रयास करें और वह भी हर रोज तो ही चीजें बदलेगी । बेहतरीन ट्रेनर, अच्छी ट्रेनिंग, ट्रेनिंग के बाद का सपोर्ट सिर्फ और सिर्फ आपका सीखना आसान करेगा, पर अंत में आप ही हो जो बदलाहट ला सकता है, सुनहरे भविष्य का निर्माण कर सकता है, जिंदगी में आगे बढ़ने का निरंतन प्रयास कर सकता है । इसीलिए इस बात का हमेशा स्मरण रखना, ‘आपके विकास की जिम्मेवारी आपकी है और आप उससे बच नहीं सकतें ।’

Sandip Shirsat NLP Master Trainer
Sandip Shirsat

CEO & Founder of Indian Board of Hypnosis & Neuro Linguistic Programming

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