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जब मनुष्य की आत्मा जगती है......

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हेलन केलर कहती है, अगर आपके जिंदगी में अडव्हेंचर नहीं है, तो आपकी जिंदगी, जिंदगी ही नहीं है । मानवी रूह के बारे में एक बात सच है, उसे भूख होती है, कुतूहल होता है, जिज्ञासा होती है, कुछ खोजने की, कुछ आविष्कृत करने की । उसे तीव्र अभिलाषा होती है कुछ समझने की, कुछ ढुंढ़ने की, कुछ जीतने की । कभी कभी ये क्षुधा ये जिज्ञासा मूर्खतापूर्ण होती है, कभी कभी जिद्दी होती है, और बहुत बार अजेय होती है ।

हमें जिंदगी में आगे बढ़ना चाहिए, नए रास्तो पर चलना चाहिए, कुछ नया करना चाहिए, क्योंकि हममें जिज्ञासा है, कुतूहल है, और यही जिज्ञासा और कुतूहल नए भविष्य का निर्माण करती है । - वाल्ट डिझने

‘इन द हर्ट ऑफ द सी’ नाम के उपन्यास में यह बताया जाता है, कि कैसे 1819 में ‘इसेक्स’ नाम का एक जंगी जहाज पॅसिफिक समंदर में व्हेल मछलियों का तेल लेने निकल पड़ा था । उन दिनों व्हेल मछलियों को मारकर उनके शरीर में जो तेल है, उसे निकाकर अलग अलग चीजों में इस्तेमाल किया जाता  था । वह तेल बहुत ही मूल्यवान और किमती था । उस विशाल समंदर में ऊंची ऊंची लहरों से टकराते हुए जहाज आगे बढ़ रहा था । धीरे धीरे मौसम खराब होने लगा । जहाज के रखवाले डटे थे, किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए । बारीश शुरू हो गई थी । जोरों से हवा बहने लगी थी । समंदर में भीषण तुफान आया था । लहरें इतनी तेज और ऊंची थी, कि जहाज में पानी भरने लगा । जहाज पर अफरातफरी मची थी । कप्तान और उसके साथियों ने खुद को और जहाज को बचाने के लिए जान की बाजी लगा दी थी । उसी वक्त एक तेज लहर जहाज पर आकर टकराई । जहाज बूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुका था । पर फिर भी कप्तान ने हार नहीं मानी थी । उसने जहाज को दूसरी दिशा में मोड़ दिया । धीरे धीरे तुफान थमने लगा । जहाज का एक हिस्सा टूट चुका था । जहाज की मरम्मत होने के बाद वे आगे बढ़ने का फैसला लेते हैं ।

लगभग तीन महीने हो चुके हैं, लेकिन एक भी व्हेल नहीं दिखी थी । उसी वक्त एक दूसरे जहाज का कप्तान उन्हें बताता है, कि यहाँ से दो हजार मील दूर समंदर के बीचोंबीच उन्हें बहुत बड़ी सफेद व्हेल मिल सकती है, पर अगर आप चौकन्ने नहीं रहे, तो वे आपपर हमला बोल देगी । अब कप्तान के पास दो रास्ते थें, एक पिछे लौट जाने का, क्योंकि पहले से ही तीन महीनों से वे समंदर में थे, या दो हजार मील समंदर के बीचोंबीच जाकर, व्हेल को मारकर उसका तेल निकाल लेना । कप्तान आगे बढ़ने का फैसला लेता है । कुछ महीनों बाद वे समंदर के बीचोंबीच उस जगह पहुँच जाते हैं, जो कि दूसरे जहाज के कप्तान ने बतायी थी ।

उन्हें पानी में कुछ हलचल नजर आती है । शांत समंदर में अचानक से लहरे तेज होने लगती है । जहाज हिलने लगता है । अचानक उन्हें समंदर में कुछ दिखता है, पर पलभर में वह नजरों से ओझल हो जाता है । समंदर के बीचोंबीच उन्हें ड़र का अहसास होने लगता है । सब लोग अपने अपने हथियारों को संभाल कर खड़े हो जाते हैं । तभी फिर से जहाज को एक और धक्का लगता है । हर कोई चौकन्ना है, चेहरे पर तनाव है, दिल में ड़र है । तभी जहाज से सिर्फ बीस फिट की दूरी पर उन्हें एक विशाल सफेद व्हेल दिखाई देती है, कुछ समझने के पूर्व व्हेल जहाज पर हमला बोल देती है, उसका हमला इतना तेज और ताकदवर होता है, कि कुछ पलो में ही जहाज तहस नहस हो जाता है । जहाज डूबने लगता है । हर कोई जान बचाने के लिए समंदर में कूद जाता है । उस डूबते जहाज से कुछ छोटी नौकाएँ और खाने का कुछ सामान निकालने में कप्तान सफल होता है ।

यहाँ से उनके बूरे दिन शुरू होते हैं । अगले कुछ महीनें वे उन छोटी नौकाओं में गुजारने के लिए मजबूर होते हैं । बिना खाना और पानी के वे तड़पने लगते हैं । शरीर सुक जाता है, उसमें घाँव बनने लगते हैं, वहाँ पर खून जम जाता है । एक दिन उनका एक साथी तड़पने लगता है, उसे पानी चाहिए, पर उस पानी भरे समंदर में पीने लायक पानी है कहाँ । आखीरकार तड़पते तड़पते वह मर जाता है । वह मरने के बाद उसके साथी उसका माँस निकालकर खा जाते हैं । और फिर कुछ दिनों बाद एक जहाज को ये छोटी नौकाएँ दिखाई देती हैं और इसप्रकार जो बचे रहें, डटे रहे, खुद को जिंदा रख पाए उन्हें बचाया जाता है ।

कभी कभी यह अडव्हेंचर, यह जिज्ञासा, यह कुतूहल, यह खोंज, मूर्खतापूर्ण होती है, कभी कभी जिद्दी होती है, कभी कभी जानलेवा होती है और बहुत बार अजेय होती है । यह पूरी कहानी हमें याद दिलाती है, हमारे अतीत की । जब हर दिन अडव्हेंचर था, हर दिन एक नई खोज थी । जरूर जिंदगी बहुत कठीन थी, जोखीम भरी थी, पर फिर भी यह अडव्हेंचर हमें हर दिन याद दिलाता था, कि हम ‘जिंदा’ है । धीरे धीरे हम आधुनिक होते गए, जिंदगी के मायने बदलते गए । जिंदगी से अडव्हेंचर खत्म हो गया । जिंदगी बहुत सुरक्षित होती गयी और इसी के साथ ही हम ‘जिंदा’ हैं, यह भाव खोता गया । हम भूल गए, कि हम मनुष्य हैं और हम रोबोट बन गए । यांत्रिक हो गए । हम भुल गए, कि हम सबके भीतर एक सुप्त इच्छा होती है कुछ खोजने की । कुतुहल होता है जानने का, जिद होती है जीतने की । हम भूल गए, कि मूलतः हम एक खोजी हैं ।

कभी कभार ‘गुरू’ फिल्म का गुरूकांत देसाई हमें फिरसे उस अडव्हेंचर की याद दिलाता है । फिल्म के आखिर में वह कहता है, “सपने मत देखो, सपने कभी सच नहीं होते, ऐसा मेरा बापू कहता था । लेकिन मैंने सपना देखा, हमने सपना देखा, हिंदुस्तान की सबसे बड़ी कंपनी बनने का सपना ।” और फिर वह सामने बैठे हजारों शेअर होल्डरस् से पूछता है, “तो क्या अपना यह सपना पूरा हुआ? और वे हजारों लोग चिल्लाते, टालिया बजाते हैं, नाचते हुए कहते हैं, “हाँ ।” और फिर गुरू पूछता है, “तो अब क्या करे, रूक जाएँ? या फिर देखे एक और सपना? .....बनना चाहते हो दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी?” और फिरसे लोग चिल्लाते, तालियाँ बजाते हैं, नाचते हुए कहते हैं, “ हाँ ” और आखिरकार गुरू कहता है, “तो फिर बता दो दुनिया को, कि हम आ रहे हैं ।”

चलो दोस्तों, एक बार फिरसे कोई सपना देखते हैं, अडव्हेंचर पर निकलते हैं, फिर से कुतूहल के भाव को जगाते हैं, फिर से कुछ खोजते हैं । एक नई दिशा में चलते हैं, एक नई सुबह देखते हैं, फिर से प्यार भरा कोई नगमा गाते हैं । भुलना मत, कि हम एक खोजी है । हम मनुष्य हैं, रोबोट नहीं । अडव्हेंचर हमारे खून में है । याद रखना ‘हम जिंदा है’ ।

‘‘जब मनुष्य की आत्मा जगती है, तब चमत्कार होने लगते हैं ।’’

- संदिप शिरसाट

(लेखक इंडियन बोर्ड ऑफ़ हिप्नोसिस अॅन्ड न्यूरो लिंगविस्टिक प्रोग्रॅमिंग के संस्थापक अध्यक्ष तथा एन.एल.पी. मास्टर ट्रेनर है ।)

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Summary:
This blog is about the Human Spirit. It can be awakened through NLP. Tools & Techniques of NLP very skillfully awaken the spirit that lies dormant in Human mind. NLP is the Science of Success. It’s the magic tool of Modelling. By becoming a Certified NLP Practitioner, you choose to control & redirect your emotions towards a desired goal.
NLP is magic in Human communication domain & you can learn this NLP magic & be NLP magician by doing NLP Practitioner at Indian Board of Hypnosis & Neuro-Linguistic Programming, the Reputed Institute in India & Asian Sub-Continent. Indian Board of Hypnosis & Neuro Linguistic Programming regularly arranges various NLP courses like NLP Practitioner, NLP Master, NLP Master Trainer etc.
Sandip Shirsat NLP Blogger
संदिप शिरसाट

लेखक इंडियन बोर्ड ऑफ़ हिप्नोसिस अॅन्ड न्यूरो लिंगविस्टिक प्रोग्रॅमिंग के संस्थापक अध्यक्ष तथा एन.एल.पी. मास्टर ट्रेनर है ।

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