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NLP Coaching in India

NLP Research Initiative by IBHNLP

NLP Research in India 1 Heartily Inviting your research articles on NLP As a CEO of IBHNLP, people keep asking me whether there is any Scientific Academic Research that supports & validates tools and techniques offered by Neuro Linguistic Programming. In short, people want to know, ‘Is NLP scientific? Whatever claims about “Human Potential Development” are made by NLP really true? Can NLP solve deeply rooted problems within a short amount of time? In initial years, I didn’t have answers to these questions, but now I could answer these questions in two ways. 1.    Frankly speaking, there is very less scientific research in the field of NLP all over the world (that is not really a good thing) & if you ask in India, I think answer is blatantly NO. 2.    But now IBHNLP has taken an initiative to provide platform for those who want to do research in the field of NLP (and that is now really a good thing.) You might have known that NLP came into existence in 1970s. Richard Bandler and John Grinder developed completely new approach towards communication, individual development and resolving various psychological issues. NLP claims that by changing some very specific brain processes, by changing use of language and by changing behavioral patterns, it is really easy and quick to realize our Dreams. It has really been easy to resolves psychological issues like depression, learning problems, phobias, ...

Want To Publish NLP Research Paper?

NLP articles 2 Some Guidelines for Submitting Blogs/Articles or Research Papers to IBHNLP Welcome to the World of NLP Research! Indian Board of Hypnosis & Neuro Linguistic Programming (IBHNLP) is one of the reputed NLP Boards, dedicated to inspire research and new thinking in the field of NLP. We offer best quality, educational & professional blogs, scholarly articles & genuine Research Papers related to NLP on our website. We attempt hard to ensure really great quality blogs. In this regard, we don’t want to publish low quality, degrading and illogical content on our website. We primarily focus on ‘New Thinking in NLP’, so we want blogs on different perspectives of NLP, Innovative Thinking, Challenging Old Beliefs and Assumptions Regarding NLP. These blogs or articles should be based on your research, experience, your extended thought on old topic or discovering something completely new. Don’t forget that your blog or an article is your voice and that voice will be echoed for years. People will read it, ponder over it, it will give new dimension to their life, it can open up new avenues for them or it will transform their life also. So before submitting your blog to Indian Board of Hypnosis & Neuro Linguistic Programming (IBHNLP), give as much time as possible to develop it. Don’t be in hurry to send us something to publish. Your blog reflects your thinking, your valu ...

माइंडफुलनेस प्रस्तावना

Research on Mindfulness 03 ब्लॉग की यह कडी दुसरे विषयों से थोड़ी अलग है । अब तक अलग अलग विषयों पर मैं ही लिखता था, पर इस कडी में हम कुछ दुसरे मास्टर्स के आर्टीकल्स पढेंगे । वैसे तो मांइफुलनेस, अवेरनेस, मेडिटेशन, कॉन्शसनेस, ध्यान, साक्षीभाव इ. सारे शब्द किसी एक ही बात की ओर इशारा करते हैं । और शायद आपको पता होगा, कि 'माइंडफुलनेस' चेंज वर्क में बड़ी ही बुनियादी बात है । इस कडी के सारे ब्लॉग इसी विषय के आसपास होंगे और इसमें हम कुछ बड़ी हस्तियों के विचारों पर सोचने का प्रयास करेंगे, जैसे कि ओशो, जे. कृष्णमूर्ती, जॉर्ज गुरर्जीएफ, एकहार्ट टोले, दिपक चोप्रा इ. । इसीलिए ब्लॉग की इस कडी को मैंने ‘मास्टर्स ऑन माइंडफ ...

थिन स्लाइसिंग और एनएलपी पार्ट 1

Thin Slicing Part 1 04 यह आपकी ‘निर्णय प्रक्रिया’ को पूरी तरह से बदल कर रख देगा । थिन स्लाइसिंग: निर्णय लेने की अंतर्मन की ताकदवर प्रक्रिया हमें कितना समय लगता है, किसी से पहली बार मिलने के बाद वह हमें कैसा लगा यह जानने के लिए ? (एक ऐसे इंन्सान के बारे में सोचे जिसे हाल ही में आप पहली बार मिले - उसे परखने में आपको कितना समय लगा?) किसी नई कल्पना पर प्रतिक्रिया करने के लिए । (थोड़ा इस कल्पना के बारे में सोचे - अगर इस दुनिया में आर्मी ही ना हो...... कितना समय लगा इस कल्पना का स्वीकार या अस्वीकार करने में ।) जब भी हमें कुछ ही पलों में निर्णय लेना अनिवार्य हो । (आपको किसी भी हालत में कम से कम सम ...

थिन स्लाइसिंग और एनएलपी पार्ट 2

Thin Slicing Part 2 04 यह आपकी ‘निर्णय प्रक्रिया’ को पूरी तरह से बदल कर रख देगा । पिछले ब्लॉग में हमने थिन स्लाइसिंग क्या है, यह जानने की कोशिश की । हमने थिन स्लाइसिंग की व्याख्या भी देखी । अब इस ब्लॉग की शुरूवात हम एक बुनियादी सवाल के साथ करते हैं, आखिरकार हमारा दिमाग थिन स्लाइसिंग को किसप्रकार से अंजाम देता है? या हमारा अडॅप्टीव्ह अन्कॉन्शस काम कैसे करता है? या स्नॅप जजमेंट या फर्स्ट इम्प्रेशन की प्रक्रिया में दिमाग में होता क्या है? और सबसे महत्वपूर्ण सवाल, सही निर्णय लेने के लिए क्या थिन स्लाइसिंग पर भरवसा किया जा सकता है । इस सवाल के जवाब में अॅमबड़ी और रोझेन्थल नामक शोधकर्त ...

थिन स्लाइसिंग और एनएलपी पार्ट 3

Thin Slicing Part 3 04 यह आपकी ‘निर्णय प्रक्रिया’ को पूरी तरह से बदल कर रख देगा । हमने पार्ट 1 में थिन स्लाइसिंग की व्याख्या पर चर्चा की थी, उसे थोड़ा दोहराते हैं । थिन स्लाइसिंग: ‘थिन स्लाइसिंग’ को आम भाषा में ‘स्नॅप जजमेंट’ या ‘फर्स्ट इम्प्रेशन’ भी कहा जाता है । इसमें हम पलक झपकते ही निर्णय तक पहुँच जाते हैं । हमारे सामने समस्या खड़ी होती है, हमारा दिमाग तुरंत उसपर विचार करता है और पलभर में हम किसी जवाब तक पहुँच जाता है । याने ‘थिन स्लाइसिंग’ में कुछ ही पलों में हमारा दिमाग निर्णय लेता है । इस ‘थिन स्लाइसिंग’ के लिए हमारी जो दिमागी प्रक्रिया होती है, जिससे कु ...

थिन स्लाइसिंग और एनएलपी पार्ट 4

Thin Slicing Part 4 04 यह आपकी ‘निर्णय प्रक्रिया’ को पूरी तरह से बदल कर रख देगा ।   पिछले ब्लॉग के सवालों से आगे शुरू करते हैं । क्या इस अडॅप्टीव्ह अन्कॉन्शस को ट्रेन किया जा सकता है, जिससे निर्णय गलत होने की संभावना को कम से कम किया जा सके? क्या इस ‘अडॅप्टीव्ह अन्कॉन्शस’ की थिन स्लाइसिंग प्रक्रिया को नियंत्रित कर दिशा दी जा सकती है? साथ ही साथ अगर ‘थिन स्लाइसिंग’ बेहतर है, तो क्या हम स्वयं को ‘थिन स्लाइसिंग’ में ट्रेन कर सकते हैं, जैसे स्टॅट्रेजिक मॅनेजमेंट में लोगों को ट्रेन किया जाता है? आप यह जानकर चौक जाएंगे कि ‘हाँ यह हो सकता है’, हम हमारे अडॅप्टीव्ह अन्कॉन्शस ...

थिन स्लाइसिंग और एनएलपी पार्ट 5

Thin Slicing Part 5 04 यह आपकी ‘निर्णय प्रक्रिया’ को पूरी तरह से बदल कर रख देगा ।   अब तक हमने ‘थिन स्लाइसिंग’ के बारे में जो चर्चा की उसके कुछ निष्कर्ष के साथ शुरूवात करते हैं । ‘थिन स्लाइसिंग’ एक बेहतरीन और ताकदवर दिमागी प्रक्रिया है, जिससे हम पलभर में सटीक निर्णय ले सकते हैं, बशर्ते ‘थिन स्लाइसिंग’ की प्रक्रिया में हम ट्रेन हो । बहुत बार ‘थिन स्लाइसिंग’ का आधार हमारे पूर्व अनुभव और ज्ञान होता है । जैसे ही हम हमारे पूर्व अनुभव और ज्ञान को दिमागी तौर पर बदलने में सक्षम हो जाते हैं ‘थिन स्लाइसिंग’ की प्रक्रिया को और बेहतर किया जा सकता है । (यहाँ पर एनएल ...

Meditation & Hypnosis

Meditation n Hypnosis 05 Quoted from osho.com जिसे आप ध्यान कह रहे हैं, उसमें और आटो-हिप्नोसिस में, आत्म-सम्मोहन में क्या फर्क है? वही फर्क है, जो नींद में और ध्यान में है। इस बात को भी समझ लेना उचित है। नींद है प्राकृतिक रूप से आई हुई, और आत्म-सम्मोहन भी निद्रा है प्रयत्न से लाई हुई। इतना ही फर्क है। हिप्नोसिस में-हिप्नोस का मतलब भी नींद होता है-हिप्नोसिस का मतलब ही होता है तंद्रा, उसका मतलब होता है सम्मोहन। एक तो ऐसी नींद है जो अपने आप आ जाती है, और एक ऐसी नींद है जो कल्टीवेट करनी पड़ती है, लानी पड़ती है। अगर किसी को नींद न आती हो, तो फिर उसको लाने के लिए कुछ करना पड़ेगा। तब एक आदमी अगर लेट ...

Krishnamurti and Mindfulness

NLP and Mindfulness 6 From https://mettarefuge.wordpress.com/2011/03/26/krishnamurti-on-how-to-meditate/ Krishnamurti on what meditation is [J. Krishnamurti had the following dialogue with students at one of his schools in India.] [Krishnamurti:] Do you know anything about meditation? Student: No, Sir. Krishnamurti: But the older people do not know either. They sit in a corner, close their eyes and concentrate, like school boys trying to concentrate on a book. That is not meditation. Meditation is something extraordinary, if you know how to do it. I am going to talk a little about it. First of all, sit very quietly; do not force yourself to sit quietly, but sit or lie down quietly without force of any kind. Do you understand? Then watch your thinking. Watch what you are thinking about. You find you are thinking about your shoes, your saris, what you are going to say, the bird outside to which you listen; follow such thoughts and enquire why each thought arises. Do not try to change your thinking. See why certain thoughts arise in your mind so that you begin to understand the meaning of every thought and feeling without any enforcement. And when a thought arises, do not condemn it, do not say it is right, it is wrong, it is good, it is bad. Just watch it, so that you begin to have a perception, a con ...
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